‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने सोशल मीडिया पर मचाई हलचल, जानिए कौन हैं इसके पीछे के चेहरे अभिजीत दीपके
इस पूरे अभियान की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में CJI जस्टिस सूर्य कांत की एक टिप्पणी के बाद हुई। 15 मई 2026 को फर्जी डिग्री से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी सामने आई, जिसमें कुछ लोगों की तुलना “कॉकरोच” से की गई थी।;
मुंबई। Cockroach Janata Party: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर एक अनोखा नाम तेजी से चर्चा में है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP)। शुरुआत में मजाक और व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ यह ऑनलाइन अभियान अब युवाओं के बीच बड़े डिजिटल आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। महज 72 घंटों के भीतर इस प्लेटफॉर्म से एक लाख से ज्यादा युवा जुड़ चुके हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या 20 लाख के पार पहुंच गई है। इस वायरल अभियान के केंद्र में हैं 30 वर्षीय अभिजीत दीपके, जिन्होंने खुद को युवाओं की निराशा, बेरोजगारी और डिजिटल संस्कृति की आवाज के रूप में पेश किया है।
कौन हैं अभिजीत दीपके?
अभिजीत दीपके मूल रूप से महाराष्ट्र के औरंगाबाद, जिसे अब छत्रपति संभाजीनगर कहा जाता है, के रहने वाले हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। अभिजीत ने हाल ही में अमेरिका की प्रतिष्ठित बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री पूरी की है। वह पेशे से पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट माने जाते हैं और डिजिटल कैंपेन तथा सोशल मीडिया ट्रेंड्स को समझने में माहिर बताए जाते हैं।
राजनीति और सोशल मीडिया का पुराना अनुभव
अभिजीत दीपके का राजनीतिक और डिजिटल अभियानों से जुड़ाव नया नहीं है। वर्ष 2020 से 2022 के बीच वह आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम में सक्रिय वॉलेंटियर के तौर पर काम कर चुके हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई राजनीतिक मीम्स और डिजिटल अभियानों के पीछे उनकी भूमिका बताई जाती है। इसके अलावा वह दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशन एडवाइजर के रूप में भी काम कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया की भाषा और युवा मानसिकता को समझने की उनकी क्षमता ने ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को तेजी से वायरल बनाने में मदद की।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे अभियान की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में CJI जस्टिस सूर्य कांत की एक टिप्पणी के बाद हुई। 15 मई 2026 को फर्जी डिग्री से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी सामने आई, जिसमें कुछ लोगों की तुलना “कॉकरोच” से की गई थी। बाद में अदालत की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह टिप्पणी आम बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री और सिस्टम के दुरुपयोग से जुड़े लोगों के संदर्भ में कही गई थी। लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो चुकी थी। नीट पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पहले से नाराज युवाओं ने इस मुद्दे को तेजी से उठाया।
It’s 1 lakh 60 thousand now.
— Cockroach Janta Party (@CJP_2029) May 19, 2026
Just wanted to let you all know. https://t.co/7zR43YUylp
मजाक से शुरू होकर आंदोलन बना
अभिजीत दीपके ने 16 मई को X पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि “क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?” इसके साथ ही उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक वेबसाइट और ऑनलाइन फॉर्म लॉन्च कर दिया। देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई। सोशल मीडिया पर मीम्स, वीडियो और व्यंग्यात्मक पोस्ट्स की बाढ़ आ गई। हजारों युवाओं ने इसे सिस्टम के खिलाफ डिजिटल विरोध का नया तरीका बताना शुरू कर दिया।
युवाओं को पसंद आई अलग शैली
इस अभियान की सबसे ज्यादा चर्चा उसकी भाषा और शैली को लेकर हो रही है। पार्टी में शामिल होने की पात्रता भी मजाकिया अंदाज में लिखी गई थी। इसमें कहा गया कि ऐसे लोग जुड़ सकते हैं जो “बेरोजगार”, “आलसी”, “क्रोनिकली ऑनलाइन” यानी हर समय इंटरनेट पर सक्रिय रहने वाले और “प्रोफेशनल तरीके से दुखड़ा रोने” की क्षमता रखते हों। यह व्यंग्यात्मक शैली खासतौर पर जेन-जी युवाओं को काफी पसंद आई और अभियान तेजी से वायरल हो गया।
नेताओं ने भी दिया समर्थन
सोशल मीडिया पर इस अभियान को कुछ राजनीतिक नेताओं का समर्थन भी मिला। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और नेता कीर्ति आजाद समेत कई सार्वजनिक हस्तियों ने इस डिजिटल व्यंग्य पर प्रतिक्रिया दी। हालांकि यह अभियान किसी औपचारिक राजनीतिक पार्टी के रूप में सामने नहीं आया है, लेकिन यह युवाओं के गुस्से और निराशा का प्रतीक बनता दिख रहा है।