मुंबई : Rahul Gandhi Defamation Case: हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ा एक पुराना और विवादित मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पुणे की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सावरकर के प्रपौत्र सात्यकि सावरकर ने अपनी गवाही में कई महत्वपूर्ण बातें स्वीकार कीं। उन्होंने कहा कि उनके परदादा विनायक दामोदर सावरकर ने ब्रिटिश शासन के दौरान अपनी सजा में राहत के लिए कुल 10 बार दया याचिकाएं दायर की थीं।
अदालत में जिरह के दौरान दी गई जानकारी
विशेष न्यायाधीश अमोल शिंदे की अदालत में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिलिंद पवार ने सात्यकि सावरकर से जिरह की। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि दया याचिकाएं ब्रिटिश सरकार के समक्ष दायर की गई थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन याचिकाओं को केवल व्यक्तिगत लाभ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इनमें अंडमान की सेलुलर जेल में बंद अन्य कैदियों की रिहाई की मांग भी शामिल थी।
'वीर' उपाधि पर नहीं पड़ता कोई असर : सात्यकि
गवाही के दौरान सात्यकि सावरकर ने अपने परदादा का बचाव करते हुए कहा कि दया याचिकाएं दायर करने से उनकी 'वीर' उपाधि पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगता। उनके अनुसार, सावरकर को 'वीर' कहकर संबोधित किए जाने की शुरुआत अंडमान की जेल भेजे जाने और पहली दया याचिका दाखिल करने से पहले ही हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि उस समय 'गदर संगठन' से जुड़ी एक पत्रिका में भी सावरकर को 'वीर' की संज्ञा दी गई थी।
स्वतंत्रता सेनानियों के अलग-अलग थे संघर्ष के तरीके
जिरह के दौरान इतिहास से जुड़े सवालों पर सात्यकि सावरकर ने माना कि स्वतंत्रता आंदोलन में सभी क्रांतिकारियों के तरीके एक जैसे नहीं थे। उन्होंने स्वीकार किया कि भगत सिंह, राजगुरु, अशफाकउल्ला खान और बटुकेश्वर दत्त जैसे कई क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के सामने कभी दया याचिका नहीं दी और अपने सिद्धांतों पर अंत तक कायम रहे। उन्होंने यह भी कहा कि भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केवल स्वयं को युद्धबंदी का दर्जा देने की मांग की थी, किसी प्रकार की रियायत की नहीं।
लंदन में दिए गए बयान से जुड़ा है पूरा विवाद
यह मामला कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मार्च 2023 में लंदन में दिए गए एक कथित बयान से जुड़ा हुआ है। सात्यकि सावरकर का आरोप है कि राहुल गांधी ने विदेशी धरती पर सावरकर की छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से गलत और भ्रामक बातें कही थीं। आरोप के अनुसार, राहुल गांधी ने दावा किया था कि सावरकर ने अपनी एक पुस्तक में लिखा था कि उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और इस घटना से उन्हें खुशी मिली थी।
सात्यकि सावरकर ने आरोपों को बताया गलत
सात्यकि सावरकर का कहना है कि उनके परदादा ने अपनी किसी भी पुस्तक में इस प्रकार की बात नहीं लिखी। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया और सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। इसी आधार पर उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
मामला पहुंचा अहम चरण में
फिलहाल यह मामला साक्ष्य और जिरह के महत्वपूर्ण दौर में पहुंच चुका है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों और गवाहियों के आधार पर आगे की सुनवाई जारी है। इस बीच, सावरकर की दया याचिकाओं को लेकर हुई स्वीकारोक्ति ने एक बार फिर इतिहास, राजनीति और स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।