मुंबई: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से जुड़ी कथित ऑडियो क्लिप ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। क्लिप में कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये दिए जाने की बात सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं, शिवसेना नेता रामदास कदम ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। भाजपा ने भी इस विवाद के पीछे विपक्षी नेताओं की कथित भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
फडणवीस बोले- ऑडियो की सच्चाई सामने आना जरूरी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कथित ऑडियो से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाशना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि करीब ढाई साल पुरानी बताई जा रही बातचीत अब अचानक सार्वजनिक क्यों हुई और इसके पीछे किसका उद्देश्य हो सकता है। फडणवीस के मुताबिक, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर मामले की जांच कराने की मांग की थी। भाजपा और मनोज जरांगे की ओर से भी जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फॉरेंसिक जांच के जरिए ऑडियो की प्रामाणिकता और उससे जुड़े तथ्यों का पता लगाने की कोशिश की जाएगी। कथित क्लिप में एक महिला की आवाज सुनाई देने का दावा किया गया है, जिसमें जरांगे तक 500 करोड़ रुपये पहुंचाए जाने का जिक्र है। हालांकि, क्लिप की वास्तविकता, उसमें मौजूद आवाजों की पहचान और बातचीत के संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
रामदास कदम ने शिंदे को निशाना बनाने का लगाया आरोप
ऑडियो विवाद के बीच शिवसेना नेता रामदास कदम ने आरोप लगाया कि एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से खत्म करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने इस मामले को महाराष्ट्र की सत्ता और राजनीतिक गठबंधन के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा। कथित ऑडियो को लेकर यह दावा भी सामने आया है कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से जरांगे तक 500 करोड़ रुपये पहुंचाए गए थे। इस दावे के बाद शिवसेना और भाजपा से जुड़े नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी भी नेता के खिलाफ आरोपों की पुष्टि जांच के नतीजों के बाद ही हो सकेगी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पहले ही जरांगे को उनके आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की चुनौती दे चुके हैं। अब फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित बातचीत असली है या उसमें किसी तरह का बदलाव किया गया है।
भाजपा ने संजय राउत और राहुल गांधी पर लगाए आरोप
भाजपा ने शनिवार को आरोप लगाया कि पार्टी को बदनाम करने के कथित अभियान के पीछे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भूमिका हो सकती है। पार्टी ने शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत पर भी एआई की मदद से ऑडियो क्लिप तैयार कराने का आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि कथित ऑडियो का उद्देश्य भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और मनोज जरांगे के बीच अविश्वास पैदा करना था। पार्टी के अनुसार, इससे कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) को राजनीतिक लाभ पहुंच सकता था। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बान ने मांग की कि मामले में संजय राउत के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी जांच करने की मांग की कि क्या कथित अभियान के लिए राहुल गांधी की ओर से कोई वित्तीय मदद दी गई थी। ये भाजपा की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने आना अभी बाकी है।
जरांगे ने बताया था आंदोलन को कमजोर करने की साजिश
मनोज जरांगे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के जालना में कथित ऑडियो सार्वजनिक किया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें चुप कराने और मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने के लिए साजिश रची गई है। इस दावे के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। मराठा आरक्षण महाराष्ट्र की राजनीति का एक अहम मुद्दा रहा है। ऐसे में आंदोलन के प्रमुख चेहरे से जुड़ी कथित बातचीत ने राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ा दिया है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब पूरे विवाद में सबसे अहम भूमिका फॉरेंसिक जांच की होगी। जांच में ऑडियो की प्रामाणिकता, उसकी रिकॉर्डिंग से जुड़ी जानकारी, आवाजों की पहचान और संभावित संपादन जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है। फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही कथित क्लिप की विश्वसनीयता और उससे जुड़े आरोपों पर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। तब तक राजनीतिक दलों के दावों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय आरोपों के रूप में देखना जरूरी है।