महाराष्ट्र सरकार पहुंची बॉम्बे हाईकोर्ट, एफएसएसएआई पर राज्य के अधिकारों में दखल का आरोप
महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय खाद्य सुरक्षा नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है;
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय खाद्य सुरक्षा नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार ने एक याचिका दायर कर केंद्रीय खाद्य सुरक्षा नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है और आरोप लगाया है कि एफएसएसएआई ने राज्य सरकार के अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए एक समानांतर और अवैध व्यवस्था खड़ी कर दी है।
यह याचिका राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अनुसार लाइसेंस जारी करने और कानून लागू करने की शक्तियां राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों के पास हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने लाइसेंसिंग रेगुलेशंस 2011, रिक्रूटमेंट रेगुलेशंस 2018 और 2026 के संशोधित नियमों के जरिए राज्य के अधिकारों को कम कर दिया है।
महाराष्ट्र सरकार ने आरोप लगाया है कि एफएसएसएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने कानून में प्रावधान न होने के बावजूद 'सेंट्रल फूड सेफ्टी ऑफिसर' के पद सृजित कर दिए, जो राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप है।
याचिका में दावा किया गया है कि 12 मई 2023 को एफएसएसएआई ने आदेश जारी कर राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को उन कंपनियों का निरीक्षण करने से रोक दिया, जिनके पास केंद्रीय लाइसेंस हैं।
राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम पोर्टल के जरिए सभी खाद्य व्यवसायों को केंद्रीय नियंत्रण में लाया गया, जिससे राज्यों की भूमिका सीमित हो गई।
महाराष्ट्र सरकार ने 10 मार्च और 13 मार्च 2026 को जारी उन अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी है, जिनमें अपील दायर करने की समय-सीमा बढ़ाई गई थी।
याचिका में कहा गया है कि इन अधिसूचनाओं को लागू करने से पहले जनता से आपत्तियां और सुझाव नहीं मांगे गए, जो कानूनी प्रक्रिया के विपरीत है।
महाराष्ट्र सरकार ने अदालत से मांग की है कि जिन नियमों को असंवैधानिक बताया गया है, उन्हें रद्द किया जाए। मई 2023 के उस आदेश पर रोक लगाई जाए, जिसके तहत राज्य अधिकारियों के निरीक्षण अधिकार सीमित किए गए। खाद्य व्यवसायों से जुड़ा लाइसेंसिंग डेटाबेस फिर से राज्य सरकार को सौंपा जाए।
इस याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ (जिसमें मुख्य न्यायाधीश महेश सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना शामिल हैं) सुनवाई करेगी।
यह मामला केंद्र और राज्यों के बीच खाद्य सुरक्षा नियमन तथा प्रशासनिक अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक बहस का रूप ले सकता है।