महाराष्ट्र में किसानों को बड़ी राहत: 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण होगा माफ, 56 लाख किसानों को मिलेगा फायदा

राज्य मंत्रिमंडल ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 36,585 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह रकम राज्य सरकार द्वारा किसानों को राहत देने के लिए किए गए सबसे बड़े वित्तीय आवंटनों में से एक मानी जा रही है।;

Update: 2026-06-03 05:04 GMT

मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमाफी योजना’ को मंजूरी दे दी गई। इस योजना के तहत राज्य के पात्र किसानों का दो लाख रुपये तक का कृषि ऋण माफ किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस फैसले से लगभग 56 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और वे कर्ज के बोझ से काफी हद तक मुक्त हो सकेंगे।

36,585 करोड़ रुपये का होगा खर्च

राज्य मंत्रिमंडल ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 36,585 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह रकम राज्य सरकार द्वारा किसानों को राहत देने के लिए किए गए सबसे बड़े वित्तीय आवंटनों में से एक मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और किसानों की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए यह फैसला आवश्यक था।

किन किसानों को मिलेगा योजना का लाभ?

सरकार द्वारा मंजूर किए गए प्रस्ताव के अनुसार, कर्जमाफी का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिनका कृषि ऋण 30 सितंबर 2025 तक बकाया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना को व्यापक और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है ताकि अधिक से अधिक पात्र किसान इसका लाभ उठा सकें। अधिकारियों के अनुसार, पात्रता संबंधी विस्तृत नियम और प्रक्रिया जल्द ही जारी की जाएगी। इसके बाद किसानों को आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी।

नियमित ऋण चुकाने वालों के लिए भी प्रोत्साहन

सरकार ने केवल डिफॉल्टर किसानों को राहत देने तक खुद को सीमित नहीं रखा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि जो किसान समय पर अपने ऋण की अदायगी करते रहे हैं और जिन्होंने किसी प्रकार का डिफॉल्ट नहीं किया है, उन्हें 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा और ईमानदारी से ऋण चुकाने वाले किसानों का मनोबल भी बढ़ेगा। लंबे समय से नियमित भुगतान करने वाले किसान ऐसी किसी प्रोत्साहन योजना की मांग कर रहे थे।

बजट पर बढ़ेगा अतिरिक्त दबाव

कर्जमाफी योजना लागू होने से राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय माना जा रहा है। 36,585 करोड़ रुपये के खर्च से सरकारी खजाने पर बड़ा भार आएगा। हालांकि सरकार का कहना है कि इस योजना का वित्तीय प्रावधान पहले ही वित्त वर्ष 2026-27 के 7.69 लाख करोड़ रुपये के बजट में शामिल किया जा चुका है। राज्य सरकार का तर्क है कि बुनियादी ढांचे के विकास, सामाजिक कल्याण योजनाओं और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के बीच संतुलन बनाते हुए किसानों को राहत देना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में कदम

यह कर्जमाफी योजना अचानक लिया गया फैसला नहीं है। भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने विधानसभा चुनाव से पहले किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद सरकार लगातार इस योजना के प्रारूप और वित्तीय व्यवस्था पर काम कर रही थी। सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों से किए गए वादे को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

खरीफ सीजन से पहले पूरी होगी प्रक्रिया

मुख्यमंत्री फडणवीस ने हाल ही में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में अधिकारियों और बैंकों को निर्देश दिए हैं कि पात्र किसानों की कर्जमाफी की प्रक्रिया 30 जून से पहले पूरी कर ली जाए। सरकार चाहती है कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसान पुराने कर्ज के बोझ से मुक्त होकर नई फसलों के लिए आवश्यक ऋण प्राप्त कर सकें।

नहीं हुई आधिकारिक घोषणा

हालांकि मंत्रिमंडल ने योजना को मंजूरी दे दी है, लेकिन अभी तक इसकी औपचारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है। इसका प्रमुख कारण राज्य में विधान परिषद चुनावों के चलते लागू आदर्श आचार संहिता है। सूत्रों के अनुसार, आचार संहिता समाप्त होने के बाद सहकारिता विभाग योजना से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश, पात्रता मानदंड और क्रियान्वयन संबंधी सरकारी परिपत्र (जीआर) जारी करेगा। इसके बाद किसानों को योजना का लाभ मिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। माना जा रहा है कि मानसून और खरीफ सीजन से पहले यह योजना लाखों किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

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