मद्रास हाई कोर्ट ने जलीकट्टू मामले पर ‘हस्तक्षेप’ से किया इनकार

 मद्रास उच्च न्यायालय ने चेन्नई स्थित मरीना बीच पर जलीकट्टू को लेकर युवाओं और छात्रों द्वारा किये जा रहे प्रदर्शन पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

Update: 2017-01-18 17:55 GMT

चेन्नई।  मद्रास उच्च न्यायालय ने चेन्नई स्थित मरीना बीच पर जलीकट्टू को लेकर युवाओं और छात्रों द्वारा किये जा रहे प्रदर्शन पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, अदालत ने कहा कि चूंकि यह मामला उच्चतम न्यायालय में चल रहा है अत: इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता ।

जब मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम सुंदर ने अपनी सीट पर बैठे तब वकील के बालू ने इस मुद्दे को उठाया और कहा कि पुलिस मरीना में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही है।

सभी प्रदर्शनकारी इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे । इस मामले में पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने पहले ही इस मुद्दे को अपने पास रखा है और इस पर पिछले हफ्ते कोई भी आदेश पारित नहीं हुआ है ।

न्यायाधीश ने कहा कि मरीना बीच प्रदर्शन के लिए कोई स्थल नहीं है ऐसे में वह इस संबंध में कुछ नहीं कर सकते । उन्होंने कहा,“इस स्तर पर अदालत हस्तक्षेप नहीं करना चाहती है।” इससे पहले, कॉलेज के छात्र-छात्राओं सहित हजारों युवक आज लगातार दूसरे दिन मरीना बीच पर इकट्ठा होकर जलीकट्टू के आयोजन की मांग कर रहे थे ।

प्रदर्शनकारियों ने मदुरै जिले के अवुनीयपुरम, पलमेडू और अलंगनल्लूर में पोंगल के दौरान जलीकट्टू का अायोजन शुरू हो गया था । इसके बाद तमिलनाडु के कई हिस्सों में लोग इसके पक्ष में एकजुटता दिखाते हुए सड़कों पर उतर कर इसके आयोजन की मांग करने लगे ।

मदुरै और चेन्नई के अलावा कोयम्बटूर, थंजावूर, कुड्डालोर, डिंडीगुल, पुडुकोट्टई, कन्याकुमारी, विरूद्धनगर, तिरूचिरापल्ली, रामनाथपुरम, नागापट्टिनम, तिरूवरूर, थेनी, तिरूनवेली, शिवगंगा और अन्य जिलों में भी युवा विशेषकर छात्र-छात्रायें प्रदर्शन कर रहे थे । 
 

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