दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपी अतहर खान की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी बड़ी साजिश के मामले में आरोपी अतहर खान को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसके खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला बनता है और यह भी माना कि उसके भागने का जोखिम है और वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है।;

Update: 2026-07-07 12:34 GMT

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी बड़ी साजिश के मामले में आरोपी अतहर खान को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसके खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला बनता है और यह भी माना कि उसके भागने का जोखिम है और वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने अतहर खान की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपनी जमानत याचिका खारिज करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।

ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दंगों के दौरान जानमाल के नुकसान का कारण बनी कथित साजिश में अतहर खान की भूमिका प्रथमदृष्टया साबित होती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत पर रिहा होने पर अतहर खान के फरार होने की संभावना है और वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

यह फैसला जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच की ओर से अतहर खान की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखने के कुछ हफ्तों के बाद आया है।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि रिकॉर्ड में रखे गए व्हाट्सएप चैट प्रथमदृष्टया कथित साजिश में अतहर खान की सक्रिय भागीदारी का संकेत देते हैं।

अतहर खान की ओर से पेश वकील अर्जुन दीवान ने तर्क दिया था कि व्हाट्सएप संदेश केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की योजनाओं को दर्शाते हैं और हिंसा भड़काने के किसी भी इरादे का खुलासा नहीं करते हैं।

वकील अर्जुन दीवान ने कहा, "मेरे संदेश स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि हम कोई सड़क जाम नहीं चाहते हैं।" साथ ही, उन्होंने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष की ओर से जिस डिलीट किए गए संदेश का हवाला दिया गया था, उसका गलत अर्थ निकाला जा रहा था।

हालांकि, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि चैट कथित साजिश के अस्तित्व और उसमें अतहर खान की भागीदारी को स्थापित करते प्रतीत होते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था, "सच कहूं तो तीसरे पक्ष के लोगों के तौर पर ये संदेश वास्तव में साजिश को साबित करते हैं। वे साबित करते हैं कि ये सभी लोग एक साथ थे। जब आप इस तरह की साजिश रचते हैं, तो चीजें हाथ से निकल सकती हैं और हम सभी 2020 में हुई घटनाओं के गवाह हैं। ये संदेश साबित करते हैं कि आप एक सक्रिय भागीदार थे। यह चौंकाने वाला है।"

बचाव पक्ष ने आगे तर्क दिया था कि अतहर खान के पास से कोई हथियार, पैसा या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई थी और उन्हें किसी भी हिंसक कृत्य से सीधे जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं था।

यह भी कहा गया था कि वह केवल स्थानीय स्तर के सुविधाप्रदाता थे, जिनकी कथित साजिश में निर्णय लेने की कोई भूमिका नहीं थी, और उन्होंने सह-आरोपी शादाब अहमद और गुलफिशा फातिमा के समान व्यवहार की मांग की, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी।

याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए। उन्होंने दलील दी थी कि अतहर खान की भूमिका उमर खालिद और शरजील इमाम जैसी थी, न कि उन सह-आरोपियों जैसी जिन्हें जमानत मिल गई थी।

एएसजी राजू ने कहा था, "वह कोई मामूली सहयोगी नहीं था। उसकी भूमिका की तुलना उमर खालिद और शरजील इमाम से की जा सकती है। 100-200 लोगों को मारने का आह्वान किया गया था। उसका मामला अलग स्तर का है।"

इस महीने की शुरुआत में, दिल्ली की एक अदालत ने उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के उस आदेश से बंधी है जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था और उनकी नई याचिकाएं सुनवाई के लायक नहीं थीं।


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