मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी का एक्शन, दिल्ली में आठ रिहायशी और कमर्शियल ठिकानों पर तलाशी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने बुधवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत 'इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड', 'इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड', उनके प्रमोटर डायरेक्टरों और दिल्ली में मौजूद रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के आठ रिहायशी और कमर्शियल ठिकानों पर तलाशी और सर्वे का काम किया।;
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने बुधवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत 'इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड', 'इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड', उनके प्रमोटर डायरेक्टरों और दिल्ली में मौजूद रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के आठ रिहायशी और कमर्शियल ठिकानों पर तलाशी और सर्वे का काम किया।
इसी को लेकर ईडी ने गुरुवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड (आईएसएल), इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड (आईडब्ल्यूपीएल) और उनके प्रमोटर डायरेक्टरों- हरप्रीत सिंह बत्रा, ब्रजिंदर सिंह बत्रा, प्रदीप शर्मा, अविनाश सेठिया और अन्य के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है। ईडी ने इस मामले की जांच हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आईडब्ल्यूपीएल और आईएसएल के डायरेक्टरों और प्रमोटरों के खिलाफ आईपीसी, 1860 के तहत दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की।
इन एफआईआर में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, बहला-फुसलाकर निवेश करवाना, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पूरे न करना, हर महीने तय रिटर्न और लीज रेंटल न चुकाना और दिल्ली-एनसीआर इलाके में निवेशकों का पैसा गलत तरीके से दूसरी जगह लगाने के आरोप लगाए गए थे। ईडी को जांच के दायरे में आए प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों से भी कई शिकायतें मिली हैं।
जांच के दौरान पता चला कि आईडब्ल्यूपीएल ने गुरुग्राम के सेक्टर 37 में 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट के खरीदारों से इकट्ठा किए गए पैसे का इस्तेमाल अपनी दूसरी देनदारियों को पूरा करने के लिए किया। साथ ही यह भी पाया गया कि कंपनी ने इन सीधे-सादे खरीदारों के निवेश को अपनी संबंधित कंपनियों या लोगों को लोन और एडवांस के तौर पर ट्रांसफर कर दिया।
आईडब्ल्यूपीएल ने 2011 से खरीदारों से बुकिंग लेना शुरू किया था, लेकिन 15 वर्ष बाद भी कंपनी खरीदारों को यूनिट का कब्जा देने में नाकाम रही। आईएसएल ने 'इंपीरिया माइंडस्पेस', गुरुग्राम और 'इंपीरिया बिजनेस पार्क', ग्रेटर नोएडा के कई खरीदारों से एडवांस बुकिंग ली थी। कंपनी ने उन्हें कब्जा देने के साथ-साथ हर महीने तय रिटर्न और बाद में लीज रिटर्न देने का वादा किया था, लेकिन वह अपने वादों को पूरा नहीं कर पाई।
इसके अलावा, जांच में कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें एक ही यूनिट के लिए कई खरीदारों से बुकिंग ली गई, जबकि जानबूझकर बीबीए (बायर-बिल्डर एग्रीमेंट) नहीं किए गए और सिर्फ एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) साइन किए गए, जिनमें यूनिट की पहचान और कब्जा देने की समय-सीमा का कोई जिक्र नहीं था। फिलहाल, 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट रिजॉल्यूशन की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
ईडी ने जानकारी दी कि अब तक की जांच से पता चला है कि आईडब्ल्यूपीएल को एल्वेडोर प्रोजेक्ट के खरीदारों से लगभग 63 करोड़ रुपए मिले। माइंडस्पेस (गुरुग्राम) और इम्पेरिया बिजनेस पार्क (ग्रेटर नोएडा) जैसे दूसरे प्रोजेक्ट्स के मामले में अपराध से हुई कमाई का हिसाब लगाया जा रहा है।
तलाशी के दौरान कई डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए, जैसे कि आईडब्ल्यूपीएल और आईएसएल के प्रमोटरों और डायरेक्टरों से जुड़े प्रॉपर्टी के कागजात, ऑडिट किए गए फाइनेंशियल रिकॉर्ड, टैली डेटा, फंड के डायवर्जन की जानकारी और खरीदारों द्वारा निवेश किए गए सभी फंड का विवरण। ईडी ने 50.50 लाख रुपए नकद और तीन महंगी लग्जरी गाड़ियां भी जब्त कीं। वहीं, ईडी की ओर से मामले से जुड़ी आगे की जांच चल रही है।