बालको में अब शराब पीकर आने वालों की होगी जांच
कोरबा-बालकोनगर ! बालको प्रबंधन ने एक नया फरमान ठेका कर्मियों के लिए जारी कर दिया है जिसकी तीखी प्रतिक्रिया क्षेत्र में होने लगी है।
नई व्यवस्था आज दूसरी पाली से होगी
कोरबा-बालकोनगर ! बालको प्रबंधन ने एक नया फरमान ठेका कर्मियों के लिए जारी कर दिया है जिसकी तीखी प्रतिक्रिया क्षेत्र में होने लगी है। संयंत्र में प्रवेश से पहले अब ठेका कर्मियों का अल्कोहल टेस्ट किया जाएगा, ताकि कोई भी ठेकाकर्मी शराब के नशे में संयंत्र के भीतर न जाने पाये। सिर्फ ठेकाकर्मियों के लिए जारी इस निर्देश को श्रम संगठनों ने अनुचित भी ठहराया है।
बालको वेदांता के औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रमुख बी शिवकुमार, कर्मचारी संबंध प्रमुख एचके भाटिया ने 15 मार्च को जारी परिपत्र में कहा है कि बालको एक बेहतर कार्यस्थल है और कार्य प्रणाली तथा कार्य प्रक्रिया में निरंतर उन्नयन करने में विश्वास रखते हैं। संयंत्र के भीतर प्रचालन के दौरान जान-माल की हानि न हो इसको ध्यान में रखते हुए प्रबंधन द्वारा निर्णय लिया गया है कि ठेका कर्मचारियों के संयंत्र में प्रवेश के दौरान संयंत्र के प्रवेश द्वार, संयंत्र के भीतर प्रत्येक पाली में सुरक्षा विभाग, सेफ्टी विभाग के द्वारा उनका अल्कोहल टेस्ट किया जाएगा। नई प्रणाली 17 मार्च को दोपहर 2 बजे ब पाली से प्रभावशील होगी। श्री शिवकुमार एवं श्री भाटिया ने समस्त ठेका कर्मचारियों से आग्रह किया है कि वे संयंत्र के सुरक्षित प्रचालन हेतु इस कार्य में पूरा सहयोग करें।
केवल ठेका कर्मचारी ही क्यों?: नेताम
इस फरमान को लेकर प्रतिक्रिया का दौर भी शुरू हो गया है। श्रम संगठन ऐक्टू के जिलाध्यक्ष बीएल नेताम ने इसे श्रमिकों को तंग करने का प्रबंधन का नया तरीका बताते हुए कहा है कि आखिर यह कैसे तय होगा कि प्रबंधन के अधिकारी शराब नहीं पीते और ऐसी कौन सी मशीन संयंत्र में लगी है जो बताती हो कि उक्त अधिकारी बिना शराब पीये काम करता है। उन्होंने मांग की गई है केवल ठेकाकर्मी ही नहीं बल्कि अधिकारी, कर्मचारी नेता सभी का बिना किसी भेदभाव के संयंत्र में प्रवेश के दौरान अल्कोहल टेस्ट होना चाहिए।
प्रबंधन की गलत नीति-रजक
बालको एटक के महासचिव एमएल रजक ने कहा कि यदि यह निर्णय सिर्फ ठेका कर्मचारियों के लिए है तो यह प्रबंधन की गलत नीति है। अल्कोहल जांच करना है तो सभी का और सबसे पहले अपने कर्मचारियों का टेस्ट करना चाहिए। वैसे भी बालको प्रबंधन ठेका कर्मियों को अपना कर्मचारी मानता ही नहीं, बल्कि उसे ठेकेदार का कर्मी मानता रहा है तो इस तरह का निर्णय थोपना मनमानी है।
9वां वेतन समझौता, श्रम हितों की अनदेखी का आरोप
बालको कर्मचारियों का 9वां वेतन समझौता प्रबंधन की कूटरचनाओं के बावजूद रजिस्टर्ड कर लिया गया है लेकिन इसमें श्रमिक हितों की अनदेखी का आरोप एक्टू के अध्यक्ष बीएल नेताम ने लगाया है। जारी बयान में श्री नेताम का कहना है कि बालको के इतिहास में पहली बार ऐसा भी हुआ कि वेतन समझौता पंजीकृत होने के बाद आज तक आमसभा या सार्वजनिक रूप से इस समझौते की जानकारी श्रमिकों को नहीं दी गई है। बालको संयुक्त श्रम संघ द्वारा 1 फरवरी को सीईओ को लिखे गए पत्र क्रमांक 27 में उल्लेख है कि 9वें वेतन समझौते में अनुकंपा नियुक्ति, प्रमोशन पालिसी, इन्सेंटिव स्कीम को वर्तमान उत्पादन के अनुरूप बनाना, डीपीएस स्कूल की फीस कम करना एवं कर्मचारियों के लिए डर्म लाइफ प्लान जैसे मुद्दे आज भी छूटे हुए हंै। श्री नेताम ने कहा कि एक तरफ वही यूनियन प्रतिनिधि वेतन समझौते को अधूरा बताकर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं जिन्होंने 16 दिसंबर 2016 को श्रमिक हितों को दरकिनार करते हुए 9वें वेतन समझौते पर हस्ताक्षर किए है। एक्टू का मानना है कि श्रमिकों के साथ वेतन समझौते में बहुत बड़ा छल किया गया है। आरोप है कि इस छल में प्रबंधन के साथ-साथ कुछ पुराने श्रमिक साथियों को भ्रमित कर भटकाने में बाहरी तत्वों की भूमिका है।