खिचड़ी-हलवा-चना खाकर कुपोषण को दूर भगाया

 छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने शुरू किया गया पोषण पुनर्वास केंद्र गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिये फायदेमंद होने के साथ उसे सेहतमंद बनाने में भी वरदान साबित हुआ है

Update: 2017-09-23 14:37 GMT

कोरबा।  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने शुरू किया गया पोषण पुनर्वास केंद्र गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिये फायदेमंद होने के साथ उसे सेहतमंद बनाने में भी वरदान साबित हुआ है। जन्म के कुछ माह पश्चात पोषण आहार की कमी से माही, रिंकू, परमेश्वर और याचना शारीरिक रूप से कमजोर थे। इनके माता-पिता ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानीनों की सलाह पर 15 दिन तक पोषण पुनर्वास केंद्र में रहकर बच्चों को पोषण आहार दिया। एनआरसी में बच्चों की न सिर्फ नियमित स्वास्थ्य जांच होती है बल्कि यहंा खिचड़ी, हलवा, सेवई, गुड़, काजू, किशमिश, चना, फल सहित पौष्टिक खाद्य सामग्री भी प्रदान की जाती है। अब ये सभी बच्चे स्वस्थ हैं। आसानी से खेलकूद सकते हंै, धमाचौकड़ी करते हैं। 

कटघोरा विकासखंड के ग्राम लोतलोता की ढाई साल की माही की माता चंद्रिका बाई ने बताया कि माही का वजन उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ रहा था। ग्राम छिर्रा निवासी श्रीमती राखी सोनी के एक साल का रिंकू भी कुछ कमजोर सा था। ग्राम कोलिहामुड़ा की याचना और परमेश्वर भी पोषण आहार की कमी से कमजोर थे। चंद्रिका बाई ने बताया कि बच्चों का वजन नही बढ़ने से बहुत चिंता होती थी। रिंकू की माता राखी सोनी ने बताया कि उन्हें पास के पोषण पुनर्वास केंद्र में ले जाने सलाह दी गई थी। 

जब वे कटघोरा स्थित साुमदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित एनआरसी में भर्ती हुये तो यहां बच्चों को 15 दिन तक नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ पोषण आहार दिये जाने से रिंकू का वजन दो किलो तक बढ़ गया। यहा 15 दिन तक रहकर पोषण आहार प्राप्त करने वाले माही ,परमेश्वर,याचना भी अब पहले से काफी स्वस्थ्य हैं और खेलकूद करते रहते हैं। चंद्रिका बाई और राखी सोनी ने शासन द्वारा संचालित पोषण पुनर्वास केद्र की प्रशंसा करते हुये कहा कि इसका लाभ गरीबों और जरूरतमंदों को उठाना चाहिये।  यहां कुपोषित बच्चों को पोषण आहार के साथ उनके माताओं को एक दिन का डेढ़ सौ रूपये प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है। 

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