शंघाई शिखर सम्मेलन में दिखा भारत का प्रभाव: एसपी वैद
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पाकिस्तान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एससीओ शिखर सम्मेलन में दिए बयानों, भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ, आतंकवाद, पाकिस्तान में हिंदू मंदिर गिराए जाने और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी;
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पाकिस्तान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एससीओ शिखर सम्मेलन में दिए बयानों, भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ, आतंकवाद, पाकिस्तान में हिंदू मंदिर गिराए जाने और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर हटाने को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और इसे भारत के प्रति उसकी मानसिकता तथा कथित हीनभावना से जोड़कर देखा।
पाकिस्तान के पीएमओ की ओर से कथित तौर पर एडिट की गई तस्वीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाए जाने पर एसपी वैद ने कहा कि यह पाकिस्तान की भारत और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति घृणा को दर्शाता है। एससीओ सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी से जिस तरह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गर्मजोशी से मुलाकात की, उससे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का पता चलता है। किसी तस्वीर से प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर हटाने से उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा पर कोई असर नहीं पड़ता। प्रधानमंत्री मोदी भारत की ओर से ही नहीं बल्कि व्यापक वैश्विक मुद्दों और मानवता से जुड़े विषयों पर भी बात करते हैं।
पाकिस्तान में करीब 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को गिराए जाने के मामले पर पूर्व डीजीपी ने कहा कि यह वहां अल्पसंख्यकों की स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भारत में किसी अल्पसंख्यक धार्मिक स्थल के साथ ऐसी घटना होती तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में व्यापक चर्चा होती, लेकिन पाकिस्तान में ऐसी घटनाओं पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दिखाई देती। किसी मंदिर को गिराने से भारत की हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति समाप्त नहीं हो सकती। हिंदू संस्कृति ने लंबे समय से अनेक चुनौतियों का सामना किया है और वह आगे भी कायम रहेगी।
एससीओ सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा युद्ध को मानवता को पीछे ले जाने वाला बताने और रूस-यूक्रेन संघर्ष समाप्त करने की अपील पर वैद ने प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पहले भी रूस के राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत के दौरान युद्ध को समस्या का समाधान नहीं बताते रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध ने दोनों देशों और पूरी दुनिया को नुकसान पहुंचाया है। युद्ध से जान-माल के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। प्रधानमंत्री की शांति की अपील को रूस और यूक्रेन दोनों को गंभीरता से लेना चाहिए।
सिंधु जल संधि के संदर्भ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की टिप्पणी पर एसपी वैद ने कहा कि भारत पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को कथित तौर पर राज्य नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। वैद ने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद रोकना चाहिए और भारत के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एससीओ मंच से आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिए जाने पर वैद ने कहा कि सम्मेलन के साझा बयान में भी आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई। उन्होंने इसे पाकिस्तान के लिए संदेश बताते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होना चाहिए। अफगानिस्तान में शांति और क्षेत्रीय स्थिरता की जरूरत पर भी प्रधानमंत्री मोदी के विचारों का उन्होंने समर्थन किया।
भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ पर एसपी वैद ने कहा कि यह केवल भारत का दावा नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों से भी इसे समर्थन मिलता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष, यूक्रेन-रूस युद्ध, महंगाई, तेल की कीमतों और सप्लाई चेन में व्यवधान जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रदर्शन महत्वपूर्ण है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच भारत की यह वृद्धि देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है और इसके लिए देशवासी बधाई के पात्र हैं।
दिल्ली में चलती बस में नाबालिग लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना पर पूर्व डीजीपी ने इसे बेहद गंभीर और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान को भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है और ऐसी घटनाओं के खिलाफ कानून का सख्ती से इस्तेमाल होना चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया।
महिलाओं को लेकर एक मुस्लिम धर्मगुरु की कथित विवादित टिप्पणी पर एसपी वैद ने कहा कि महिलाओं को घर तक सीमित करना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध किसी विशेष पहनावे या समुदाय से नहीं, बल्कि अपराधी की मानसिकता से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं देश के हर क्षेत्र में योगदान दे रही हैं और उन्हें सार्वजनिक जीवन से दूर रखने की सोच स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। भारत में महिलाओं की सामाजिक, राजनीतिक, सैन्य और पेशेवर भागीदारी का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्र भागीदारी को भारतीय समाज के लिए आवश्यक बताया।