वॉशिंगटन/तेहरान/रियाद: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के कई ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन ठिकानों से अमेरिकी सैनिकों, सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। सैन्य कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान की ओर से जवाबी मिसाइल हमले किए जाने का दावा सामने आया, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
30 से अधिक ड्रोन हमलों के बाद की गई कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी ठिकानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमले हुए थे। अमेरिका का आरोप है कि इन हमलों के पीछे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उससे जुड़े सशस्त्र समूहों का हाथ था। इसी के जवाब में इराक स्थित कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गई। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की कोशिश जारी रही तो आगे भी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
जॉर्डन की ओर दागी गईं बैलिस्टिक मिसाइलें
CENTCOM ने दावा किया कि एयरस्ट्राइक के बाद ईरान समर्थित तत्वों ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही इंटरसेप्ट कर लिया। अमेरिकी सेना के मुताबिक इस हमले में किसी सैनिक या सैन्य ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा।
बसरा में PMF मुख्यालय में विस्फोट
इसी बीच इराक के बसरा प्रांत से भी विस्फोट की खबर सामने आई है। अल जज़ीरा ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के मुख्यालय में धमाका हुआ। PMF, जिसे हश्द अल-शाबी के नाम से भी जाना जाता है, इराक में सक्रिय कई ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों का गठबंधन है। हालांकि विस्फोट के कारण और संभावित हताहतों के बारे में आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।
ईरान ने आरोपों को किया खारिज
ईरान ने सऊदी अरब और अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। सरकारी प्रसारक IRIB के मुताबिक, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि तेहरान का किसी भी ऐसे ड्रोन या मिसाइल हमले से कोई संबंध नहीं है। अधिकारी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में होने वाली हर सैन्य घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना गलत और भ्रामक है। ईरान का कहना है कि इस तरह के आरोप क्षेत्रीय हालात को और जटिल बना रहे हैं।
सऊदी ने ड्रोन हमले की पुष्टि की
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि देश के पूर्वी हिस्से में स्थित तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर कई ड्रोन भेजे गए थे। हालांकि सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। रियाद ने इन हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
हूती विद्रोहियों का तेल टैंकर पर हमले का दावा
यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकर 'एनसीसी गजल' पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का दावा किया है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी एक टैंकर के पास विस्फोट होने की पुष्टि की है। घटना के बाद संबंधित जहाज को अपना मार्ग बदलकर वापस लौटना पड़ा। इस घटनाक्रम ने लाल सागर के समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी नई चिंता पैदा कर दी है।
कूटनीतिक प्रयासों के बीच बढ़ा सैन्य दबाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वाशिंगटन में महत्वपूर्ण बैठक हुई है। माना जा रहा है कि बैठक में ईरान की गतिविधियों, क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित रणनीतिक कदमों पर विस्तार से चर्चा हुई। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास हालात को नियंत्रण में ला पाएंगे या पश्चिम एशिया एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।