अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, ट्रंप और नेतन्याहू के संभावित सैन्य कार्रवाई और ग्राउंड ऑपरेशन की चर्चा तेज

सूत्रों के मुताबिक, ईरान की ओर से भेजा गया जवाब अमेरिकी प्रशासन की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। इसी कारण ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई।;

Update: 2026-05-12 06:36 GMT

वॉशिगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें लगभग खत्म होती नजर आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव पर ईरान की ओर से आए जवाब को वॉशिंगटन ने स्वीकार नहीं किया है। इसके बाद अमेरिका और इजरायल की रणनीति को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब ईरान के परमाणु ठिकानों को लेकर अधिक आक्रामक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, संभावित योजना का सबसे अहम हिस्सा ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को कब्जे में लेना हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा कोई भी सैन्य अभियान बेहद जोखिम भरा और जटिल साबित होगा।

ट्रंप ने खारिज किया ईरान का प्रस्ताव

सूत्रों के मुताबिक, ईरान की ओर से भेजा गया जवाब अमेरिकी प्रशासन की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। इसी कारण ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर लंबी चर्चा हुई, जिसमें ईरान के खिलाफ आगे की रणनीति पर विचार किया गया। हालांकि बातचीत का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि संभावित सैन्य कार्रवाई और ग्राउंड ऑपरेशन जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई है।

संवर्धित यूरेनियम बना सबसे बड़ा मुद्दा

अमेरिका और इजरायल की सबसे बड़ी चिंता ईरान का संवर्धित यूरेनियम भंडार बताया जा रहा है। पश्चिमी देशों का मानना है कि यदि ईरान इस यूरेनियम का उपयोग आगे बढ़ाता है, तो उसकी परमाणु क्षमता मजबूत हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि अमेरिका किसी न किसी तरीके से ईरान के संवर्धित यूरेनियम तक पहुंचने में सफल रहेगा। वहीं इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी संकेत दिए कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य अभियान के जरिए यूरेनियम को बाहर निकाला जा सकता है। इन बयानों के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से किसी विशेष ऑपरेशन की तैयारी कर सकते हैं।

ईरान के परमाणु केंद्र क्यों हैं चुनौती?

विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्र नतांज, फोर्दो और इस्फहान उसके परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ माने जाते हैं। ये सभी केंद्र जमीन के नीचे और पहाड़ी इलाकों में बनाए गए हैं, ताकि बाहरी हमलों से सुरक्षित रह सकें। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले संघर्षों के दौरान इन इलाकों पर कई हमले किए गए थे, लेकिन इनकी संरचना इतनी मजबूत है कि पूरी तरह नुकसान पहुंचाना आसान नहीं है। कई सैन्य विशेषज्ञ इन अंडरग्राउंड ठिकानों को “कंक्रीट की कब्र” तक बता रहे हैं, क्योंकि इनके भीतर प्रवेश करना और सुरक्षित बाहर निकलना बेहद कठिन माना जाता है।

संभावित ग्राउंड ऑपरेशन की रणनीति

माना जा रहा है कि यदि कोई सैन्य अभियान शुरू होता है, तो सबसे पहले अमेरिका और इजरायल एयरस्ट्राइक के जरिए ईरान की सैन्य तैनाती को कमजोर करने की कोशिश करेंगे। इसके बाद विशेष सैनिक दल हेलिकॉप्टरों के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास उतर सकते हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन सैनिकों के साथ परमाणु सामग्री की पहचान करने वाली विशेष टीमें भी हो सकती हैं। उनका उद्देश्य संवर्धित यूरेनियम का पता लगाना और उसे सुरक्षित कंटेनरों में निकालना होगा। हालांकि सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया बेहद जटिल होगी, क्योंकि कई सुरंगें और रास्ते पहले से क्षतिग्रस्त या मलबे से भरे हो सकते हैं।

सुरंगों और पहाड़ों का जाल बना बड़ी चुनौती

ईरान के परमाणु केंद्रों के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था और सुरंगों का विस्तृत नेटवर्क मौजूद बताया जाता है। विशेष रूप से नतांज के पास स्थित पिकएक्स पहाड़ियों को लेकर अमेरिकी एजेंसियां सतर्क हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां बड़ी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम छिपाए जाने की आशंका है। यह क्षेत्र पहाड़ों के भीतर गहराई में स्थित है और वहां तक पहुंचने के रास्ते बेहद सीमित और जटिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्पष्ट नक्शे और स्थानीय जानकारी के इस तरह के सुरंग नेटवर्क में प्रवेश करना अमेरिकी सैनिकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी गलत कदम से ऑपरेशन फंस सकता है।

सैटेलाइट निगरानी बढ़ी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका की स्पेस फोर्स लगातार ईरान के परमाणु केंद्रों पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति या वाहन इन संवेदनशील इलाकों के करीब पहुंचता है, तो अमेरिकी एजेंसियां उसकी गतिविधियों का पता लगा सकती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैटेलाइट्स खास तौर पर नतांज क्षेत्र और उसके आसपास की पहाड़ियों की निगरानी कर रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि ईरान किसी भी संभावित हमले से पहले अपने संवर्धित यूरेनियम को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश कर सकता है।

युद्ध की आशंका से बढ़ी वैश्विक चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संभावित ग्राउंड ऑपरेशन में लंबे समय तक संघर्ष की आशंका रहेगी। ऐसे में यह केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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