यूनेस्को ने वेस्ट बैंक और लेबनान के ऐतिहासिक स्थल विश्व धरोहर सूची में शामिल, इजरायल की आपत्ति दरकिनार
सोल, यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक संगठन) ने इजरायल की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए वेस्ट बैंक के एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल और दक्षिणी लेबनान के पांच ऐतिहासिक किलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया है।;
सोल, यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक संगठन) ने इजरायल की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए वेस्ट बैंक के एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल और दक्षिणी लेबनान के पांच ऐतिहासिक किलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया है।
इनमें लेबनान का ब्यूफोर्ट कैसल (किला) भी है जिस पर हाल ही में इजरायल ने कब्जा किया था। क्रूसेडर काल का यह ऐतिहासिक किला कलाअत अल-शकीफ के नाम से भी जाना जाता है। इसे मई में लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान के दौरान इजरायली सेना ने अपने कब्जे में लिया था।
विश्व धरोहर सूची में डालने का निर्णय शुक्रवार को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की बैठक में लिया गया। इससे कुछ दिन पहले इजरायल के विदेश मंत्रालय ने समिति से इन प्रस्तावों को अस्वीकार करने की अपील की थी।
हालांकि, समिति ने मध्य पूर्व में जारी संघर्षों का हवाला देते हुए आपातकालीन आधार पर नामांकनों की समीक्षा की और वेस्ट बैंक के सेबास्तिया नगर और लेबनान के माउंट अमेल क्षेत्र के पांच किलों को विश्व धरोहर सूची के साथ-साथ संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में भी शामिल करने का फैसला किया।
यूनेस्को के अनुसार, कब्जे वाले वेस्ट बैंक के नाबलुस के पास स्थित सेबास्तिया पुरातात्विक स्थल में विभिन्न सभ्यताओं के क्रमिक शासन और बसावट के प्रमाण सुरक्षित हैं, जिनका इतिहास ईसा पूर्व 9वीं शताब्दी तक जाता है।
वहीं, लेबनान के माउंट अमेल क्षेत्र के ये पांच किले मध्यकाल से लेकर 19वीं शताब्दी के बीच के हैं। यूनेस्को ने कहा कि ये किले क्रूसेडर, अय्यूबी, ममलूक, उस्मानी (ऑटोमन) शासन तथा स्थानीय सामंती शासकों के अलग-अलग दौर और उनके अनुसार हुए निर्माण व बदलाव को दर्शाते हैं।
दक्षिणी लेबनान के जबल अमेल क्षेत्र में स्थित ये पांचों किले यूनेस्को द्वारा सामूहिक रूप से विश्व धरोहर सूची में शामिल किए गए हैं। यह पर्वतीय इलाका युद्ध के दौरान इजरायली हवाई हमलों का बार-बार निशाना बना है।
यूनेस्को ने कहा कि इन ऐतिहासिक किलों को संघर्ष के दौरान नुकसान पहुंचा है और उन पर अब भी खतरा बना हुआ है। संगठन के अनुसार, स्थिति इतनी गंभीर है कि इन स्थलों को आपातकालीन प्रक्रिया के तहत विश्व धरोहर सूची और संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में शामिल करना आवश्यक हो गया।