ट्रंप-शी रिश्तों में बदला अंदाज, टैरिफ से व्यापार तक चीन के सामने अमेरिका की नई रणनीति

शी की यह अमेरिका की एक दशक से अधिक समय बाद पहली राजकीय यात्रा होगी। ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप उनके सम्मान में व्हाइट हाउस में राजकीय भोज भी देंगे।;

Update: 2026-09-21 07:13 GMT

वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के रिश्तों में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान एक दिलचस्प बदलाव दिखाई दे रहा है। जिस चीन को अमेरिकी राष्ट्रपति कभी अमेरिकी उद्योग और मध्यवर्ग के लिए बड़ी चुनौती बताते थे, अब उसी देश के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ उनके सार्वजनिक संबंधों में अपेक्षाकृत गर्मजोशी नजर आ रही है। ट्रंप ने हाल में शी को ‘ग्रेट जेंटलमैन’ कहकर संबोधित किया और दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को भी बेहतर बताया। शी चिनफिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में उनके सम्मानॉ में राजकीय भोज आयोजित करने की तैयारी भी हो रही है।

चीन पर पुराने आरोप, अब बदली भाषा

ट्रंप के राजनीतिक सफर में चीन लंबे समय तक आर्थिक और रणनीतिक आलोचना का प्रमुख विषय रहा है। वह चीन पर अमेरिकी कारखानों को नुकसान पहुंचाने, अमेरिकी नौकरियों को प्रभावित करने और मध्यवर्ग पर दबाव बढ़ाने जैसे आरोप लगाते रहे हैं। इसके अलावा ट्रंप ने बीजिंग पर अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप और 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी मतदाताओं की सूचनाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश के आरोप भी लगाए थे। हालांकि, दूसरे कार्यकाल में चीन को लेकर ट्रंप की सार्वजनिक भाषा में बदलाव नजर आ रहा है। पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों के दौरान चीन की कथित भूमिका से जुड़े सवालों पर भी ट्रंप ने बीजिंग के खिलाफ वैसा आक्रामक रुख नहीं अपनाया, जैसा उनके पिछले बयानों से संकेत मिलता था।

टैरिफ की नीति से सामने आई नई चुनौती

ट्रंप प्रशासन ने चीन के खिलाफ टैरिफ को अपनी आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देना और चीन के साथ व्यापार असंतुलन को कम करना रहा है। लेकिन इस नीति के सामने चीन की दुर्लभ खनिजों पर मजबूत पकड़ एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, आधुनिक तकनीक और कई रणनीतिक उद्योगों के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों की वैश्विक आपूर्ति में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिकी दबाव के जवाब में बीजिंग ने निर्यात नियंत्रण का इस्तेमाल किया। इससे अमेरिका को कई मौकों पर अपनी रणनीति में नरमी दिखानी पड़ी।

चीन की अर्थव्यवस्था पर टैरिफ का सीमित असर

अमेरिकी टैरिफ के बावजूद चीन के विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र पर अपेक्षित दबाव नहीं दिखा। चीन ने अमेरिका के अलावा दूसरे वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2025 में चीन का व्यापार अधिशेष करीब 1.2 खरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। अगस्त 2026 में भी चीन के निर्यात में सालाना आधार पर करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर और दूसरे उच्च तकनीकी उत्पादों की मांग ने निर्यात को सहारा दिया। इससे यह संकेत मिलता है कि टैरिफ के बावजूद चीन की विनिर्माण क्षमता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उसकी भूमिका बनी हुई है।

शी के स्वागत की भव्य तैयारी

ट्रंप का बदला हुआ रुख उनके व्यक्तिगत व्यवहार में भी दिखाई देता है। ट्रंप मई में चीन की यात्रा कर चुके हैं और वहां मिले स्वागत की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की थी। अब शी चिनफिंग की अमेरिका यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में हेलीपैड तैयार किया गया है। शी की यह अमेरिका की एक दशक से अधिक समय बाद पहली राजकीय यात्रा होगी। ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप उनके सम्मान में व्हाइट हाउस में राजकीय भोज भी देंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस में निर्माणाधीन नया बड़ा बालरूम यात्रा तक तैयार नहीं हो पाएगा। ट्रंप ने इस पर अपनी निराशा भी जाहिर की है।

व्यापार से एआई तक, बातचीत में कई मुद्दे

आगामी ट्रंप-शी बैठक में केवल टैरिफ ही चर्चा का विषय नहीं होंगे। दुर्लभ खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक प्रतिबंध जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक कुछ गैर-रणनीतिक वस्तुओं पर टैरिफ में सीमित राहत की संभावना हो सकती है, लेकिन दुर्लभ खनिजों के निर्यात नियंत्रण में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। इससे संकेत मिलता है कि वाशिंगटन की चीन नीति में टकराव और संवाद दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। ट्रंप का शी के प्रति नरम सार्वजनिक अंदाज केवल व्यक्तिगत संबंधों का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापार, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक निर्भरता से जुड़े व्यावहारिक हित भी दिखाई देते हैं। टैरिफ के बावजूद चीन की आर्थिक और विनिर्माण क्षमता मजबूत रहने के बीच अमेरिका के लिए बीजिंग पर दबाव बनाए रखते हुए बातचीत का रास्ता खुला रखना भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

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