वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक संघर्षों, विशेषकर गाजा युद्ध, में मध्यस्थता के लिए शुरू की गई अपनी पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पहल में शामिल होने से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के कथित इनकार के बाद ट्रंप ने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव कर दिया है। यह धमकी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका फ्रेंच वाइन का सबसे बड़ा बाजार है और वर्तमान में इन उत्पादों पर 15 प्रतिशत का आयात शुल्क लगता है।
ट्रंप का तीखा बयान
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने मैक्रों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कोई उन्हें नहीं चाहता, क्योंकि वह बहुत जल्द पद से हटने वाले हैं। मैं उनकी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाऊंगा और तब वह बोर्ड में शामिल हो जाएंगे। हालांकि, उन्हें शामिल होने की जरूरत नहीं है।” ट्रंप की यह टिप्पणी फ्रांस में भी राजनीतिक बहस का कारण बन गई है। उल्लेखनीय है कि मैक्रों का पांच वर्षीय राष्ट्रपति कार्यकाल मई 2027 में समाप्त हो रहा है और फ्रांसीसी कानून के तहत वह तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं लड़ सकते।
ट्रुथ सोशल पर चैट का खुलासा
ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर मैक्रों के साथ हुई एक अनौपचारिक बातचीत का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। इस चैट के अनुसार, विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक के बाद मैक्रों ने ट्रंप को जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था। मैक्रों ने संदेश में लिखा कि फ्रांस और अमेरिका सीरिया के मुद्दे पर एकमत हैं और ईरान को लेकर भी दोनों देश ‘अच्छी चीजें’ कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने ग्रीनलैंड पर ट्रंप के रुख को लेकर अपनी असमर्थता जाहिर की और कहा कि वह इस नीति को समझ नहीं पा रहे हैं। साझा किए गए स्क्रीनशॉट में ट्रंप का कोई जवाब दिखाई नहीं देता, यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने प्रतिक्रिया दी या नहीं। मैक्रों के करीबी एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि साझा किया गया संदेश वास्तविक है। ट्रंप ने भी इस बात की पुष्टि की कि यह बातचीत हुई थी।
पुतिन को भी न्योता
ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रस्तावित ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुतिन उन कई विश्व नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें इस पहल के लिए चुना गया है। इस बयान ने पश्चिमी देशों में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पहले से ही पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।
कौन-कौन देश बोर्ड में शामिल
अब तक बहरीन, बेलारूस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का फैसला कर लिया है। तुर्किये ने संकेत दिए हैं कि वह इस पर जल्द निर्णय करेगा। दूसरी ओर, नार्वे ने इस पहल से दूरी बना ली है। इजरायल के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि उनके देश को बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अमेरिका बोर्ड के सदस्यों की आधिकारिक घोषणा कर सकता है।
यूरोप में नाराजगी और सख्त सुर
ट्रंप की टैरिफ धमकी और आक्रामक बयानबाजी पर यूरोप से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि वह ट्रंप की मांगों के आगे नहीं झुकेंगी और ग्रीनलैंड को नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से अमेरिकी राष्ट्रपति ने सेना के इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है। इसलिए बाकी दुनिया भी इस संभावना को नजरअंदाज नहीं कर सकती।” डावोस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश ग्रीनलैंड से जुड़े किसी भी अमेरिकी टैरिफ का कड़ा विरोध करेगा। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ बताया।
‘चापलूसी का समय खत्म’
नाटो के पूर्व महासचिव और डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री एंडर्स फोग रासमुसेन ने ट्रंप की नीतियों पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ट्रंप की चापलूसी करने का समय खत्म हो चुका है और अब इससे कोई फायदा नहीं होगा। रासमुसेन ने कहा, “ट्रंप केवल ताकत और एकता की भाषा समझते हैं। यूरोप को यही दिखाना होगा। अगर अमेरिका नाटो सहयोगियों पर टैरिफ लगाता है, तो यूरोप को आर्थिक रूप से करारा जवाब देना चाहिए।” उनके अनुसार, ट्रंप की जिद 1949 में नाटो की स्थापना के बाद से गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, नाटो का भविष्य दांव पर लगा हुआ है ।
मैक्रों का जवाब: सम्मान बनाम धमकी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ट्रंप की धमकियों के जवाब में कहा कि यूरोपीय संघ को ‘सबसे ताकतवर के कानून’ के आगे नहीं झुकना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि हमें आर्थिक वृद्धि चाहिए, हमें इस दुनिया में स्थायित्व चाहिए, लेकिन हम धमकाने वालों के बजाय सम्मान पसंद करते हैं।” मैक्रों ने अमेरिका-ईयू व्यापार समझौते को निलंबित करने के विचार का समर्थन किया है और यूरोपीय संघ से तथाकथित ‘ट्रेड बजूका’ जैसे कड़े आर्थिक उपायों के इस्तेमाल में हिचकिचाहट न दिखाने का आग्रह किया है।
बाजारों और कूटनीति पर असर
फ्रांसीसी वाइन पर 200 प्रतिशत टैरिफ की धमकी ने वैश्विक बाजारों में भी चिंता बढ़ा दी है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह कदम अमल में आता है, तो इससे न केवल फ्रांस के वाइन उद्योग को झटका लगेगा, बल्कि अमेरिका-यूरोप व्यापार संबंधों में भी गहरी दरार पड़ सकती है। कूटनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वास्तव में वैश्विक शांति की दिशा में एक प्रयास है या फिर यह ट्रंप की दबाव-आधारित कूटनीति का एक और उदाहरण है। फिलहाल, ट्रंप के तीखे बयानों और टैरिफ धमकियों ने एक बार फिर ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है।