अंकारा में बोले ट्रंप, 'मेरे हिसाब से ईरान के साथ एमओयू अब खत्म'

अंकारा, पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अब खत्म हो गया है।;

By :  IANS
Update: 2026-07-08 10:16 GMT

अंकारा, पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अब खत्म हो गया है।

कुछ सप्ताह पहले तक ईरान के नेतृत्व को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख रखने वाले राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बार तेहरान के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।

ट्रंप ने कहा, "उनमें कुछ गड़बड़ है। वे बीमार हैं और गंदा खेल खेलते हैं।" हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह अपने वार्ताकारों को बातचीत जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि "वो लोग (ईरान) केवल समय बर्बाद कर रहे हैं।"

ये बयान यूएस सेंट्रल कमांड और ईरान की आईआरजीसी के बीच हुए हमले के तनावपूर्ण माहौल में सामने आया है।

इस बीच यूएई के वरिष्ठ राजनयिक अनवर गर्गश का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में कतर और सऊदी अरब के कमर्शियल टैंकरों पर ईरान के हमले और बहरीन और कुवैत के खिलाफ बार-बार की आक्रामकता यह दिखाती है कि तेहरान तनाव कम करने और "युद्ध का अध्याय समाप्त करने" की जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ है।

यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार गर्गश ने बुधवार को एक्स पोस्ट में कहा, "खाड़ी के अरब देश, तनाव बढ़ाने और समझदारी, स्थिरता व शांति के रास्ते के बीच ईरान के बदलते रुख का निशाना नहीं बन सकते।"

बुधवार को यूएस सेंटकॉम की ओर से ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे के बाद आईआरजीसी ने भी अमेरिका के 85 बेस पर जवाबी कार्रवाई की बात कही।

ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने दक्षिणी ईरान पर अमेरिका के हमलों के जवाब में बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी बलों को निशाने पर लेते हुए ड्रोन हमला किया।

सेना ने कहा कि अमेरिका द्वारा युद्धविराम का बार-बार और खुलेआम उल्लंघन करने के गंभीर परिणाम होंगे और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब सैन्य ड्रोन हमलों के वैध लक्ष्य होंगे।

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