ट्रंप के दबाव के बीच रक्षा खर्च बढ़ाने में जुटे नाटो देश, अरबों डॉलर के समझौते घोषित

नाटो शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने अरबों डॉलर के रक्षा सौदों की घोषणा की। ट्रंप ने यूरोप से रक्षा खर्च बढ़ाने और तुर्किये पर प्रतिबंधों में राहत के संकेत दिए।;

Update: 2026-07-08 07:41 GMT
अंकारा। नाटो देशों ने रक्षा व्यय बढ़ाने की दिशा में बड़े कदम उठाते हुए कई अरब डॉलर के हथियार सौदों की घोषणा की है। इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस लंबे समय से चले आ रहे आग्रह के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वे यूरोपीय सहयोगियों से अपनी सुरक्षा पर अधिक निवेश करने की मांग करते रहे हैं।

रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने पर जोर

तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में महासचिव मार्क रूटे ने रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सैन्य तकनीक के आधुनिकीकरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रूस के अलावा चीन, उत्तर कोरिया और ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए गठबंधन को तेजी से अपनी तैयारियां मजबूत करनी होंगी।

रूटे ने घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में सदस्य देश एंटी-ड्रोन प्रणालियों के विकास और तैनाती पर 40 अरब डॉलर से अधिक खर्च करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर किसी भी प्रकार की ढिलाई की गुंजाइश नहीं है।

कई नए रक्षा सौदों की घोषणा

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते सामने आए। यूरोपीय देशों ने अमेरिकी कंपनी नॉर्थरोप ग्रुम्मन से आधुनिक निगरानी ड्रोन खरीदने का फैसला किया है। वहीं, नाटो ने स्वीडन की रक्षा कंपनी साब से नए विमानों की खरीद का समझौता किया है। इसके अलावा, अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और जर्मनी की राइनमेटाल जर्मनी में एटीएसीएमएस मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन के लिए साथ काम करेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से यूरोप की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और अमेरिकी हथियारों पर निर्भरता को संतुलित करने में मदद मिलेगी।

ट्रंप ने फिर दोहराई अधिक योगदान की मांग

सम्मेलन से पहले जारी वीडियो संदेश में ट्रंप ने यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा के लिए अधिक संसाधन लगाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि सामूहिक सुरक्षा तभी प्रभावी होगी, जब सभी सदस्य अपनी जिम्मेदारी समान रूप से निभाएं।

तुर्किये पर प्रतिबंधों में राहत के संकेत

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि तुर्किये पर लगाए गए कुछ प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं और एफ-35 लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री पर पुनर्विचार किया जाएगा। वर्ष 2019 में तुर्किये द्वारा रूस से एस-400 प्रणाली खरीदने के बाद उसे एफ-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया था।

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