क्या अब थम जाएगा ईरान युद्ध? जानें ट्रंप-पुतिन की बातचीत में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार तेज हो रहा है और वैश्विक स्तर पर इसके असर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। रूस की ओर से बताया गया कि बातचीत खुली, विस्तृत और रचनात्मक माहौल में हुई, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

Update: 2026-03-10 04:32 GMT
वॉशिंगटन/ मॉस्‍को : Trump-Putin Talks: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध के बीच अमेरिका और रूस के बीच बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई है। इस बातचीत में ईरान से जुड़े युद्ध को जल्द राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से खत्म करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार तेज हो रहा है और वैश्विक स्तर पर इसके असर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। रूस की ओर से बताया गया कि बातचीत खुली, विस्तृत और रचनात्मक माहौल में हुई, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

बातचीत में क्या-क्या मुद्दे उठे

रूस के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार यूरी उशाकोव के मुताबिक, ट्रंप और पुतिन के बीच हुई बातचीत में मुख्य रूप से ईरान से जुड़े युद्ध, यूक्रेन की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर चर्चा हुई। उशाकोव ने कहा कि दोनों नेताओं ने मौजूदा संघर्ष के व्यापक प्रभावों को समझने और उसे कम करने के लिए संभावित कूटनीतिक रास्तों पर विचार किया। पुतिन ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए राजनीतिक समाधान तलाशना जरूरी है।

ईरान युद्ध को लेकर पुतिन का रुख

रूस की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति पुतिन ने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने बताया कि रूस इस मुद्दे पर लगातार सक्रिय कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है। पुतिन ने ट्रंप को जानकारी दी कि वह खाड़ी देशों के कई नेताओं, ईरान के राष्ट्रपति और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ लगातार संवाद में हैं। उनका मानना है कि यदि सभी पक्ष बातचीत की मेज पर आएं तो राजनीतिक समाधान के जरिए युद्ध को जल्द समाप्त किया जा सकता है। रूस लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

ट्रंप ने युद्ध की अवधि को लेकर क्या कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को “अल्पकालिक” बताया है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध बहुत लंबे समय तक नहीं चलेगा। एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना इस अभियान में शुरुआती योजनाओं से भी आगे बढ़ चुकी है और ऑपरेशन तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप का कहना है कि मौजूदा सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना और अमेरिकी हितों की रक्षा करना है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि परिस्थितियां अनुकूल होती हैं तो राजनीतिक समाधान की दिशा में भी आगे बढ़ा जा सकता है।

ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का दावा

ईरान की सैन्य स्थिति को लेकर ट्रंप ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि युद्ध के दौरान ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक ईरान की नौसेना, संचार व्यवस्था और वायुसेना को गंभीर क्षति हुई है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता कमजोर हुई है। ट्रंप ने कहा कि यही वजह है कि यह संघर्ष ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल पाएगा। 

वैश्विक तेल बाजार और वेनेजुएला पर भी चर्चा

फोन पर हुई बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर भी चर्चा की। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है, जिसे लेकर दुनिया भर के देश सतर्क हैं। बताया गया कि ट्रंप और पुतिन ने तेल बाजार की स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर भी विचार किया। इसके अलावा वेनेजुएला की स्थिति और वहां के ऊर्जा संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता

ईरान से जुड़े इस संघर्ष ने दुनिया की प्रमुख शक्तियों को कूटनीतिक रूप से सक्रिय कर दिया है। अमेरिका और रूस के बीच हुई यह बातचीत इसी बढ़ती कूटनीतिक हलचल का हिस्सा मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रमुख देश मिलकर राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास करते हैं तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्या इससे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने का रास्ता निकल पाता है।

Tags:    

Similar News