ईरान-अमेरिका वार्ता पर फिर संकट, ट्रंप ने 60 दिन की डेडलाइन बढ़ाने से किया इन्‍कार

अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का सबसे अहम मुद्दा तेहरान का परमाणु कार्यक्रम है। वॉशिंगटन की प्रमुख मांग है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करे। अमेरिका का तर्क है कि ईरान की परमाणु गतिविधियों से क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है।;

Update: 2026-08-18 04:52 GMT

वॉशिंगटन: Iran US talks: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर एक बार फिर गतिरोध गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के लिए तय 60 दिन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सोमवार को यह अवधि पूरी हो गई, लेकिन दोनों देशों के बीच उन प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जो संभावित समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वह उस तरह की डील के लिए तैयार नहीं है, जिसे अमेरिका जरूरी मानता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट और स्थायी शांति समझौते को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का सबसे अहम मुद्दा तेहरान का परमाणु कार्यक्रम है। वॉशिंगटन की प्रमुख मांग है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करे। अमेरिका का तर्क है कि ईरान की परमाणु गतिविधियों से क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है। दूसरी ओर, ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण ऊर्जा जरूरतों के लिए है। तेहरान अपने परमाणु अधिकारों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। यही वजह है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों की बातचीत किसी निर्णायक समझौते तक नहीं पहुंच पाई है।

17 जून को हुआ था समझौता

मौजूदा बातचीत की पृष्ठभूमि में 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता ज्ञापन यानी MOU हुआ था। इसके तहत दोनों देशों ने बातचीत के लिए 60 दिनों की अवधि तय की थी। इस दौरान परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी स्थिति और व्यापक शांति समझौते जैसे मुद्दों पर समाधान तलाशने की कोशिश होनी थी। हालांकि, समयसीमा समाप्त होने तक किसी बड़े मुद्दे पर ठोस सहमति नहीं बन सकी। MOU में जरूरत पड़ने पर बातचीत की अवधि बढ़ाने का विकल्प मौजूद था, लेकिन पिछले कई हफ्तों से वार्ता में कोई खास प्रगति नहीं हुई थी। ऐसे में ट्रम्प ने डेडलाइन बढ़ाने से इनकार कर दिया।

होर्मुज स्ट्रेट भी बड़ी चुनौती

दोनों देशों के बीच बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी अहम बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है। अमेरिका चाहता है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से सामान्य आवाजाही सुनिश्चित हो, जबकि ईरान इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा समझौते से जोड़ता रहा है। दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तों के कारण यहां भी सहमति बनना मुश्किल साबित हुआ है।

ईरान ने डेडलाइन को बताया अप्रासंगिक

ईरान ने भी 60 दिन की समयसीमा बढ़ाने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच वास्तव में बातचीत शुरू ही नहीं हुई थी। बघाई के मुताबिक, अमेरिका ने शुरुआत से ही समझ के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं। इसलिए तेहरान के नजरिए से 60 दिन की समयसीमा का कोई खास महत्व नहीं है।

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