मिनियापोलिस। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (ICE) के एक अधिकारी द्वारा महिला की कार में गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस घटना के बाद न सिर्फ राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, बल्कि अमेरिका की सख्त इमिग्रेशन नीतियों पर भी नई बहस छिड़ गई है। स्थानीय प्रशासन और संघीय अधिकारियों के बीच इस मामले को लेकर तीखा टकराव देखने को मिल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मिनियापोलिस में ICE की एक कार्रवाई के दौरान 37 साल की रेनी निकोल गुड अपनी कार में मौजूद थी। इसी दौरान एक ICE अधिकारी ने गोली चला दी, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारी का नाम अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसे लेकर स्थानीय प्रशासन और संघीय एजेंसियों के दावों में भारी विरोधाभास नजर आ रहा है।
मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने इस घटना को “लापरवाही से गोली चलाने” का मामला बताया है, जबकि संघीय अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि अधिकारी ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी।
मेयर बनाम संघीय एजेंसियां
मेयर जैकब फ्रे ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ICE और संघीय आव्रजन कार्रवाइयों की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि संघीय अधिकारी मिनियापोलिस और सेंट पॉल जैसे शहरों में सुरक्षा स्थापित करने नहीं आए हैं।
मेयर फ्रे ने बयान में कहा, “वे जो कर रहे हैं, उससे अमेरिका में सुरक्षा नहीं मिलेगी। वे अराजकता और अविश्वास फैला रहे हैं। वे परिवारों को तोड़ रहे हैं। वे हमारी सड़कों पर अराजकता फैला रहे हैं और इस मामले में सचमुच लोगों की जान ले रहे हैं।” मेयर ने यह भी दावा किया कि अधिकारी इस घटना को आत्मरक्षा के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने खुद घटना का वीडियो देखा है।मेयर फ्रे ने कहा, “मैं सबको सीधे तौर पर बताना चाहता हूं कि यह दावा पूरी तरह बकवास है!
ट्रंप प्रशासन का रुख
इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने मृत महिला को ही जिम्मेदार ठहराया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि महिला मौके पर मौजूद ICE एजेंट्स के काम में दखल दे रही थी और उनका व्यवहार उकसाने वाला था।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अधिकारी को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ, जिसके चलते उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई। हालांकि, इस दावे को लेकर स्थानीय प्रशासन और नागरिक संगठनों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सड़कों पर उतरे लोग, ICE को राज्य से बाहर करने की मांग
घटना के बाद मिनियापोलिस और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने ICE को मिनेसोटा से बाहर करने की मांग की है। कई जगहों पर “ICE आउट ऑफ मिनेसोटा” और “जस्टिस फॉर द विक्टिम” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संघीय एजेंसियां बिना स्थानीय प्रशासन के सहयोग और पारदर्शिता के कार्रवाई कर रही हैं, जिससे आम नागरिकों की जान खतरे में पड़ रही है। नागरिक अधिकार संगठनों ने भी इस घटना को “अत्यधिक बल प्रयोग” का उदाहरण बताया है।
इमिग्रेशन नीतियों पर फिर छिड़ी बहस
यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीतियां पहले से ही विवादों में हैं। अवैध आव्रजन के खिलाफ कड़े कदम, बड़े पैमाने पर छापेमारी और ICE की सक्रियता को लेकर अमेरिका के कई शहरों में असंतोष देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिनियापोलिस की यह घटना ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति और संघीय एजेंसियों के अधिकारों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकती है। कई डेमोक्रेट नेताओं और स्थानीय प्रशासन ने पहले भी ICE की कार्रवाइयों को “अत्यधिक और असंवेदनशील” बताया है।
जांच और जवाबदेही की मांग
इस बीच स्थानीय नेताओं और नागरिक संगठनों ने घटना की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ सकती। मेयर जैकब फ्रे ने भी कहा है कि शहर प्रशासन संघीय एजेंसियों से जवाबदेही की मांग करता रहेगा। उन्होंने कहा, कोई भी एजेंसी कानून से ऊपर नहीं है। अगर किसी की लापरवाही से जान गई है, तो उसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
आगे क्या?
फिलहाल, मिनियापोलिस में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है, जबकि प्रदर्शन जारी हैं। इस घटना ने एक बार फिर अमेरिका में संघीय आव्रजन एजेंसियों की भूमिका, उनके अधिकारों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर और तूल पकड़ सकता है।