पश्चिम एशिया में जंग का दायरा बढ़ा: हूती विद्रोही भी कूदे मैदान में, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहराया संकट

हूती विद्रोही पहले भी गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों को बाधित कर चुके हैं। ऐसे में उनकी सक्रियता से वैश्विक शिपिंग रूट्स पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

Update: 2026-03-29 07:58 GMT
तेहरान/तेल अवीव/वॉशिंगटन: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले एक महीने से जारी सैन्य संघर्ष अब तेजी से व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता जा रहा है। अब तक प्रत्यक्ष रूप से शामिल न रहे ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी दक्षिणी इजरायल पर मिसाइल हमला कर इस संघर्ष में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है। हूती विद्रोहियों के इस कदम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। खासकर वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब अल-मंदेब मार्ग पर भी खतरा मंडराने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही यह जंग अब तीन मोर्चों पर फैल चुकी है. ईरान, लेबनान-इजरायल फ्रंट और अब यमन से नया मोर्चा खुल गया है

हूती विद्रोहियों की एंट्री, समुद्री मार्गों पर खतरा

रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, हूती संगठन ने इजरायल पर किए गए मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने अल-मसीरा चैनल पर इसकी पुष्टि की। हालांकि, इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने इस मिसाइल को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया। लेकिन इस घटना का रणनीतिक महत्व कहीं अधिक है, क्योंकि यह संकेत देता है कि संघर्ष अब और अधिक देशों और गुटों को अपनी चपेट में ले सकता है। गौरतलब है कि हूती विद्रोही पहले भी गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों को बाधित कर चुके हैं। ऐसे में उनकी सक्रियता से वैश्विक शिपिंग रूट्स पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

ईरान के परमाणु केंद्र निशाने पर

इजरायल ने ईरान के बुशहर परमाणु केंद्र पर एक बार फिर हमला किया है। यह पिछले 10 दिनों में इस केंद्र पर तीसरा हमला है। हालांकि, अब तक किसी रेडिएशन रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इस तरह के हमलों को लेकर चिंता जताई है। इससे पहले शुक्रवार को भी ईरान के दो अन्य परमाणु केंद्रों पर हमले हुए थे। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने परमाणु ठिकानों पर हमले से बचने की सलाह दी है, क्योंकि इससे बड़े स्तर पर मानवीय और पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकता है।

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई

इस बीच अमेरिका ने भी ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी नौसेना के जहाजों पर हमले के वीडियो जारी किए हैं। होर्मुज जलमार्ग को खुला रखने के लिए अमेरिका लगातार ईरानी नौसैनिक क्षमताओं को निशाना बना रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न यूनिट के करीब 3500 सैनिक ईरान के नजदीक तैनात किए गए हैं, जो जमीनी अभियानों के लिए प्रशिक्षित हैं। यह तैनाती इस बात का संकेत है कि संघर्ष और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

ईरान के जवाबी हमले, अमेरिकी ठिकाने निशाने पर

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला कर करीब 24 अमेरिकी सैनिकों को घायल कर दिया। इसके अलावा फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के जहाजों और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम को भी निशाना बनाने का दावा किया गया है। ईरानी पक्ष के अनुसार, कई सैन्य ठिकानों और जहाजों को नुकसान पहुंचा है। दुबई और अबू धाबी के पास भी हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिनमें कथित तौर पर अमेरिकी सैनिक प्रभावित हुए हैं।

यूएई में भारतीय नागरिक घायल

संघर्ष का असर खाड़ी देशों में भी साफ दिख रहा है। यूएई में वायु रक्षा प्रणाली द्वारा एक बैलिस्टिक मिसाइल को निष्क्रिय किए जाने के बाद उसका मलबा गिरने से पांच भारतीय नागरिक घायल हो गए। अबू धाबी प्रशासन के अनुसार, घटना के बाद तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। इस घटना ने क्षेत्र में काम कर रहे लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

लेबनान, कुवैत और बहरीन भी प्रभावित

संघर्ष का असर लेबनान तक पहुंच गया है, जहां इजरायली हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो गई। इजरायल ने दावा किया कि इनमें से एक व्यक्ति हिजबुल्ला से जुड़ा था। कुवैत में ड्रोन हमले के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की रडार प्रणाली क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें इंटरसेप्ट कर लिया गया। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि युद्ध अब पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।

कूटनीतिक कोशिशें तेज

तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान से बातचीत में अमेरिका के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे किसी भी समझौते की संभावना पर संदेह बढ़ गया है। वहीं, तुर्किए ने संवाद के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है। मिस्र, तुर्किए और सऊदी अरब के विदेश मंत्री पाकिस्तान में शांति वार्ता को लेकर रणनीति बनाने वाले हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से बातचीत कर मध्यस्थता की संभावनाओं पर चर्चा की है। हालांकि, ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल अमेरिका को हमलों के लिए न करने दें।

ट्रंप का बयान और वैश्विक चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि युद्ध के बाद अमेरिकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी। हालांकि, उनके इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

बहुस्तरीय युद्ध की ओर बढ़ता संकट

पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष अब केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कई क्षेत्रीय और नान स्‍टेट एक्‍टर शामिल हो चुके हैं। हूती विद्रोहियों की एंट्री, समुद्री मार्गों पर बढ़ता खतरा, परमाणु ठिकानों पर हमले और खाड़ी देशों तक फैलती हिंसा इस बात के संकेत हैं कि स्थिति बेहद जटिल और विस्फोटक हो चुकी है। 
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