मॉस्को/लंदन/पेरिस। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज हो गई है। रूस और चीन ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे “बिना उकसावे का आक्रमण” और एक संप्रभु देश के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है। मॉस्को ने तत्काल कूटनीतिक प्रयासों की बहाली की मांग की है और संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से निष्पक्ष मूल्यांकन का आग्रह किया है। यूरोपीय देशों और पाकिस्तान ने भी हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
“पूर्व-नियोजित आक्रमण, वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा”
रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी और इजरायली बलों द्वारा ईरानी क्षेत्र पर किए गए हमलों को “पूर्व-नियोजित” करार देते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक है। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि किसी संप्रभु राष्ट्र की संवैधानिक व्यवस्था और नेतृत्व को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को कमजोर कर सकती है। बयान में कहा गया कि यदि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है, तो इसके गंभीर मानवीय, आर्थिक और संभावित रेडियोलॉजिकल परिणाम हो सकते हैं।
रूस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए), से अपील की कि वे इन घटनाओं का “तत्काल और निष्पक्ष” आकलन करें। मॉस्को ने यह भी कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और आपसी सम्मान के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान खोजने में सहयोग देने के लिए तैयार है।
“अस्थिर करने वाले हमले चिंताजनक”
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने अमेरिका की कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि हाल के महीनों में इस तरह के “अस्थिर करने वाले हमलों” की पुनरावृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि रूस सभी पक्षों से संयम बरतने और वार्ता के माध्यम से विवाद सुलझाने की अपील करता है। जखारोवा ने आरोप लगाया कि हमलों का उद्देश्य ऐसे देश के नेतृत्व को कमजोर करना है, जो बाहरी दबाव के आगे नहीं झुका। उनके अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और नियम-आधारित प्रणाली के खिलाफ एक गंभीर चुनौती है।
मेदवेदेव का तंज: “शांति का चेहरा बेनकाब”
रूस के पूर्व राष्ट्रपति और सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “शांति स्थापित करने वाले चेहरे की हकीकत अब सामने आ गई है।” उनका यह बयान मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव पर रूस के सख्त रुख को दर्शाता है। मेदवेदेव के बयान को रूस की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह पश्चिमी देशों की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए खुद को अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थक दिखाने की कोशिश कर रहा है।
चीन ने कहा- ईरान पर हमले तुरंत रोके जाने चाहिए
चीन की सरकार ने कहा कि वह अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों को लेकर बहुत चिंतित है और सैन्य कार्रवाई को तुरंत रोका जाना चाहिए और वार्ताओं की टेबल पर जाना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा- "ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। "
यूरोप की प्रतिक्रिया: तनाव कम करने की अपील
इटली: तनाव घटाने के प्रयासों का समर्थन
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के कार्यालय ने कहा कि इटली क्षेत्रीय देशों के संपर्क में है और तनाव कम करने की पहलों का समर्थन करेगा। इटली ने यह भी दोहराया कि वह ईरान की आम जनता के नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के पक्ष में है। रोम का मानना है कि किसी भी व्यापक संघर्ष से पूरे भूमध्यसागरीय क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
फ्रांस: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक की मांग
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पश्चिम एशिया की स्थिति को “बेहद खतरनाक” बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। मैक्रों ने यह भी कहा कि ईरान को अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा और बातचीत के माध्यम से समाधान की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। फ्रांस का जोर इस बात पर है कि कूटनीति ही एकमात्र टिकाऊ रास्ता है।
नार्वे: “प्रिवेंटिव हमले की कानूनी शर्तें पूरी नहीं”
नार्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी “प्रिवेंटिव” (पूर्व-निवारक) हमले को तभी उचित ठहराया जा सकता है, जब खतरा तात्कालिक और स्पष्ट हो। उनके अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में इस मानक की पूर्ति होती दिखाई नहीं देती। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद का रास्ता अपनाने का आग्रह किया।
ब्रिटेन की चिंता: बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष भड़कने का खतरा
लंदन से मिली जानकारी के अनुसार, ब्रिटेन को आशंका है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती है। एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र में मौजूद ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा है। उन्हें 24 घंटे कांसुलर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ब्रिटेन ने बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है। साथ ही, लंदन ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन समाधान का रास्ता बातचीत और कूटनीति ही होना चाहिए।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: “जंग तुरंत रुके”
इस्लामाबाद से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने तत्काल युद्धविराम और शांतिपूर्ण समाधान की मांग की। पाक विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, डार ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में विकसित हो रही स्थिति की समीक्षा की और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। पाकिस्तान ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श (एडवाइजरी) भी जारी किया है, जिसमें उन्हें ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। इस कदम को एहतियाती उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
बढ़ता वैश्विक दबाव और कूटनीति की चुनौती
ईरान पर हमलों के बाद जिस तरह से वैश्विक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, उससे स्पष्ट है कि मामला केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है। रूस, यूरोपीय देशों और पाकिस्तान की प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि कई देश स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक पहल जल्द शुरू नहीं हुई, तो यह टकराव ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक बाजारों और सुरक्षा ढांचे पर व्यापक असर डाल सकता है। पश्चिम एशिया पहले से ही अस्थिरताओं से जूझ रहा है, और ऐसे में किसी बड़े सैन्य संघर्ष के परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।
पश्चिम एशिया पर टिकी दुनिया की नजरें
वर्तमान परिदृश्य में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित पक्ष बातचीत की मेज पर लौटेंगे या सैन्य कार्रवाइयों का सिलसिला जारी रहेगा। संयुक्त राष्ट्र और आईएईए जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर यदि परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील स्पष्ट है- संयम, संवाद और कूटनीति। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या तनाव कम होगा या यह संकट एक बड़े भू-राजनीतिक टकराव में बदल जाएगा। फिलहाल, दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर टिकी हैं, जहां हर कदम वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।