ईरान की प्रतिक्रिया का गलत अनुमान? ट्रंप प्रशासन पर सवाल, तेल कीमतों में उछाल और पश्‍चिम एशिया में बढ़ा तनाव

रिपोर्ट के अनुसार हमले से पहले ट्रंप प्रशासन के भीतर यह धारणा थी कि इस सैन्य कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने फरवरी में कहा था कि उन्हें तेल बाजार में बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है।

Update: 2026-03-11 05:31 GMT
वॉशिंगटन। Miscalculated Iran response: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकारों पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने ईरान पर अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बाद संभावित प्रतिक्रिया का सही आकलन नहीं किया। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने यह कम करके आंका कि ईरान इस हमले का कितना आक्रामक जवाब दे सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सैन्य कार्रवाई से पहले व्हाइट हाउस के भीतर कुछ विशेषज्ञों ने तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई थीं, लेकिन कई वरिष्ठ सलाहकारों ने इन चेतावनियों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ गया है और पश्‍चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया है।

तेल आपूर्ति पर खतरे को बताया गया था कम

रिपोर्ट के अनुसार हमले से पहले ट्रंप प्रशासन के भीतर यह धारणा थी कि इस सैन्य कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने फरवरी में कहा था कि उन्हें तेल बाजार में बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है। उनका तर्क था कि पहले भी जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा था, तब तेल की कीमतें थोड़े समय के लिए जरूर बढ़ीं, लेकिन जल्द ही स्थिर हो गई थीं। हालांकि कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि ईरान सीधे सैन्य कार्रवाई के अलावा आर्थिक युद्ध के जरिए भी जवाब दे सकता है। इसमें दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित करने की संभावना भी शामिल थी। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरने के लिए जाना जाता है।

ईरान का आक्रामक पलटवार

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई के बाद ईरान ने अपेक्षा से कहीं अधिक आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों, अरब देशों के प्रमुख शहरों और इजरायल के आबादी वाले क्षेत्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। बताया जा रहा है कि खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही भी कम हो गई है। शिपिंग कंपनियां सुरक्षा जोखिमों के कारण अपने मार्ग बदल रही हैं या गतिविधियों को धीमा कर रही हैं। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने लगा है।

तेल कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता

ईरान की प्रतिक्रिया के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अमेरिका के घरेलू बाजार पर भी पड़ने लगा है। व्हाइट हाउस के लिए यह स्थिति राजनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से चुनौतीपूर्ण बन गई है क्योंकि बढ़ती ईंधन कीमतें सीधे अमेरिकी उपभोक्ताओं को प्रभावित करती हैं। प्रशासन अब गैस और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए आपातकालीन विकल्पों पर विचार कर रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर स्पष्ट योजना नहीं

डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने दावा किया है कि प्रशासन के पास अभी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित तरीके से फिर से खोलने की कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी बीच अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी स्वीकार किया है कि ईरान के कड़े पलटवार ने पेंटागन को कुछ हद तक चौंका दिया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन के भीतर कुछ अधिकारी इस बात से निराश हैं कि युद्ध को समाप्त करने के लिए स्पष्ट रणनीति अभी तक सामने नहीं आई है।

कूटनीतिक रास्ते की तलाश

मौजूदा हालात के बीच ट्रंप प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को लेकर बड़े और कठोर राजनीतिक बदलावों की मांग कर रहे हैं। वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ अपेक्षाकृत सीमित सैन्य लक्ष्यों की बात कर रहे हैं, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और कूटनीतिक समाधान का रास्ता खुला रह सके।

व्हाइट हाउस ने किया बचाव

इन आलोचनाओं के बीच व्हाइट हाउस ने अपने रुख का बचाव किया है। प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि तेल बाजार में अस्थायी व्यवधान को ईरान से उत्पन्न खतरे को खत्म करने के लिए जरूरी कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। फिलहाल मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात और ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आगे की रणनीति क्या होगी और अमेरिका इस संकट से कैसे निपटेगा।

Tags:    

Similar News