काठमांडू। नेपाल की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। काठमांडू महानगरपालिका के लोकप्रिय मेयर बालेंद्र शाह उर्फ ‘बालेन’ ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय राजनीति में सीधी एंट्री कर ली। इस्तीफे के तुरंत बाद बालेन रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए। पार्टी ने उन्हें आगामी संसदीय चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। नेपाल में ये चुनाव पांच मार्च को होने हैं।
बालेन का यह फैसला न केवल काठमांडू की स्थानीय राजनीति, बल्कि पूरे देश की सियासी दिशा को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। खास बात यह है कि वह पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत स्थित झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, जहां उनका मुकाबला सीधे-सीधे नेपाल के सबसे ताकतवर और अनुभवी नेताओं में गिने जाने वाले केपी शर्मा ओली से होगा।
मेयर पद से इस्तीफा, राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख
बालेंद्र शाह ने काठमांडू महानगरपालिका के मेयर पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि अब वह “स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर देशव्यापी बदलाव” के लिए काम करना चाहते हैं। मेयर के रूप में अपने कार्यकाल में बालेन ने अतिक्रमण विरोधी अभियानों, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और सोशल मीडिया के जरिए जनता से सीधे संवाद के चलते खास पहचान बनाई थी। उनके समर्थकों का मानना है कि बालेन ने काठमांडू में जिस तरह प्रशासनिक फैसलों में तेजी और पारदर्शिता दिखाई, उसी मॉडल को वह राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना चाहते हैं। इस्तीफे के बाद उन्होंने संकेत दिया कि “देश को पुराने राजनीतिक ढर्रे से बाहर निकालने के लिए नए सोच और नए नेतृत्व की जरूरत है।”
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हुए बालेन
इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद बालेन ने औपचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। आरएसपी अपेक्षाकृत नई पार्टी है, लेकिन शहरी युवाओं, मध्यम वर्ग और प्रवासी नेपाली समुदाय के बीच इसका प्रभाव तेजी से बढ़ा है।
पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने बालेन को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करते हुए कहा, “बालेन शाह नए नेपाल की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह ईमानदारी, दक्षता और साहस के प्रतीक हैं।” लामिछाने ने यह भी कहा कि पार्टी का उद्देश्य “भ्रष्टाचार-मुक्त, जवाबदेह और तकनीक-संचालित शासन” देना है और बालेन इस एजेंडे के सबसे मजबूत चेहरा हैं।
झापा-5 से चुनाव, ओली को सीधी चुनौती
बालेन के करीबी सूत्रों के मुताबिक वह झापा-5 संसदीय सीट से चुनाव लड़ेंगे। यह सीट नेपाल की राजनीति में बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि यहीं से केपी शर्मा ओली, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष, चुनाव लड़ते रहे हैं। ओली हाल ही में प्रधानमंत्री पद से हटे हैं। उन्होंने नौ सितंबर को इस्तीफा दिया था, जब उनकी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे। ये प्रदर्शन खास तौर पर भ्रष्टाचार, इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए थे।
जेन जी आंदोलन और ओली सरकार का पतन
ओली सरकार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई मुख्य रूप से युवा नेतृत्व वाले जेन जी समूह ने की थी। सोशल मीडिया पर सक्रिय इस पीढ़ी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह डिजिटल स्वतंत्रता को कुचल रही है और भ्रष्टाचार के मामलों को दबा रही है। प्रदर्शन कई जगह हिंसक भी हो गए, जिसके बाद सरकार पर दबाव बढ़ता चला गया। अंततः ओली को इस्तीफा देना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वह पृष्ठभूमि है, जिसने बालेन जैसे नेताओं के लिए राष्ट्रीय राजनीति में जगह बनाई।
बालेन बनाम ओली: नई बनाम पुरानी राजनीति
झापा-5 सीट पर प्रस्तावित मुकाबले को नई राजनीति बनाम पुरानी राजनीति के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर केपी शर्मा ओली हैं, जिन्होंने दशकों तक नेपाली राजनीति पर प्रभाव डाला, कई बार प्रधानमंत्री रहे और मजबूत पार्टी संगठन के नेता माने जाते हैं। दूसरी ओर बालेन शाह हैं, जो राजनीतिक परिवार से नहीं आते, लेकिन अपनी प्रशासनिक शैली और सोशल मीडिया प्रभाव के जरिए युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह चुनाव इस बात का संकेत देगा कि नेपाल की जनता पारंपरिक दलों और नेताओं पर भरोसा जारी रखती है या फिर नए प्रयोग के लिए तैयार है।
युवाओं और शहरी मतदाताओं पर नजर
बालेन की सबसे बड़ी ताकत युवा और शहरी मतदाता माने जा रहे हैं। काठमांडू में मेयर के तौर पर उन्होंने जिस तरह युवाओं को सीधे संवाद में शामिल किया, उससे उनकी एक अलग छवि बनी। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी भी खुद को “पुराने दलों का विकल्प” बताती रही है, जिससे दोनों का गठजोड़ स्वाभाविक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि बालेन झापा जैसे क्षेत्र में भी युवाओं और मध्यम वर्ग को इकट़ठा कर पाए, तो यह नेपाली राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
नेपाल की राजनीति का सबसे चर्चित विषय
फिलहाल बालेन शाह का इस्तीफा और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनना नेपाल की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बन चुका है। चुनाव तक आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि उनका करिश्मा स्थानीय स्तर तक सीमित था या वह राष्ट्रीय राजनीति में भी वही प्रभाव छोड़ पाएंगे। एक बात तय मानी जा रही है कि पांच मार्च का संसदीय चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं होगा, बल्कि यह नेपाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुकाबला साबित हो सकता है।