लंदन/ यरुशलम: Israel UK Dispute: वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को लेकर इजरायल और पश्चिमी देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों से जुड़े कारखानों और खेतों में तैयार होने वाले सामान के आयात पर रोक लगाने का फैसला किया है। इन देशों का कहना है कि वेस्ट बैंक में इजरायली विस्तार की गतिविधियां दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं को कमजोर कर रही हैं। तीनों देशों के इस कदम को 12 अन्य देशों का भी समर्थन मिला है। इस फैसले के बाद इजरायल ने ब्रिटेन के खिलाफ कड़े जवाबी कदमों का ऐलान किया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मंजूरी के बाद यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने की घोषणा की है।
ब्रिटेन के खिलाफ इजरायल के चार बड़े कदम
इजरायल ने ब्रिटेन की नीतियों के जवाब में चार प्रमुख कदम उठाने की बात कही है। सबसे अहम फैसला यरुशलम स्थित ब्रिटिश कांसुलेट को बंद करने का है। इसके अलावा किर्यात गात स्थित इंटरनेशनल गाजा सपोर्ट सेंटर से ब्रिटिश प्रतिनिधियों को हटाया जाएगा। तीसरे कदम के तहत रामल्लाह में ब्रिटिश सपोर्ट टीम के माध्यम से फिलिस्तीनी अथॉरिटी के सुरक्षा बलों को दी जा रही ब्रिटिश ट्रेनिंग रोकने का फैसला किया गया है। चौथे कदम में 12 ब्रिटिश निर्वाचित प्रतिनिधियों और कुछ अन्य ब्रिटिश नागरिकों के इजरायल में प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है। इजरायल का आरोप है कि ये लोग कथित तौर पर यहूदी-विरोधी या इजरायल-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं अथवा इजरायल के अस्तित्व को नकारने वाली गतिविधियों का समर्थन करते हैं।
वेस्ट बैंक की बस्तियों को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
वेस्ट बैंक पर इजरायल के कब्जे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता नहीं मिली है। इस क्षेत्र में इजरायली बस्तियों का विस्तार लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। आलोचकों का आरोप है कि इन बस्तियों के विस्तार से फलस्तीनियों के लिए भविष्य में स्वतंत्र राष्ट्र की संभावना और क्षेत्रीय संपर्क प्रभावित होता है। इन्हीं बस्तियों में संचालित कुछ खेतों और कारखानों से उत्पादित सामान विदेशों में भी भेजे जाते हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने ऐसे उत्पादों के आयात पर रोक लगाने का फैसला किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रतिबंध का प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव सीमित हो सकता है, लेकिन इसका राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश महत्वपूर्ण है। इसके जरिए इजरायल पर वेस्ट बैंक में बस्ती विस्तार की नीति पर पुनर्विचार का दबाव बनाने की कोशिश की गई है।
ब्रिटेन बोला- सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा
ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने प्रतिबंधों का बचाव करते हुए कहा कि उनका देश अन्याय और शोषण की स्थिति को लंबे समय तक केवल बयान देकर नहीं देख सकता। ब्रिटेन को इसे रोकने के लिए व्यावहारिक कदम भी उठाने होंगे। ब्रिटेन का मानना है कि वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों का लगातार विस्तार स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के गठन की राह में बाधा पैदा कर रहा है। मिलिबैंड के यहूदी होने का उल्लेख भी इस बहस में किया गया है, हालांकि ब्रिटिश सरकार का रुख उसकी विदेश नीति और वेस्ट बैंक की स्थिति को लेकर है।
कनाडा और फ्रांस ने भी बताया अपना पक्ष
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के गठन को क्षेत्रीय शांति और इजरायल के दीर्घकालिक हितों के लिए जरूरी बताया है। उनके अनुसार दो-राष्ट्र समाधान से क्षेत्र में स्थिरता बढ़ सकती है और फलस्तीनियों के साथ न्याय की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। वहीं फ्रांस ने वेस्ट बैंक के इजरायली सेटलरों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को लेकर सुरक्षा और हिंसा की चिंता जताई है। फ्रांसीसी पक्ष का तर्क है कि ऐसे उत्पादों की खरीद अप्रत्यक्ष रूप से उन गतिविधियों को समर्थन दे सकती है, जिनसे क्षेत्र में तनाव और हिंसा बढ़ती है। हालिया रिपोर्टों में इजरायली सरकार पर कट्टरपंथी यहूदी सेटलरों को समर्थन देने के आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप है कि कुछ सेटलर फलस्तीनियों की जमीन पर कब्जे के बाद वहां खेती या अन्य आर्थिक गतिविधियां कर रहे हैं।
आंतरिक मामलों में दखल का आरोप
इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने ब्रिटिश सरकार के कदमों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और एकतरफा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्रिटेन इजरायल के आंतरिक मामलों और उसकी चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहा है। सार ने कहा कि इजरायल को ब्रिटेन के आम नागरिकों से कोई समस्या नहीं है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं। हालांकि, उनके मुताबिक ब्रिटेन की मौजूदा लेबर सरकार लगातार इजरायल के खिलाफ कदम उठा रही है। इजरायल ने वेस्ट बैंक की बस्तियों और E1 क्षेत्र को लेकर ब्रिटेन की आलोचना को भी खारिज किया है। सार ने कहा कि E1 से जुड़े विकास संबंधी फैसले एक साल से अधिक पुराने हैं और फलस्तीनी क्षेत्रों के बीच संपर्क प्रभावित होने का ब्रिटिश दावा आधारहीन है।
व्यापार प्रतिबंध से आगे बढ़ा कूटनीतिक टकराव
इजरायल ने ब्रिटेन की उन नीतियों पर भी नाराजगी जताई है, जिनमें कुछ इजरायली मंत्रियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध, हथियार निर्यात लाइसेंस पर रोक, मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत रोकना और सैन्य-सुरक्षा सहयोग सीमित करना शामिल है। सार ने चेतावनी दी है कि इजरायल के खिलाफ कार्रवाई करने वाली अन्य सरकारों के विरुद्ध भी जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं। इसी क्रम में ब्रिटिश कांसुलेट बंद करने और ब्रिटिश प्रतिनिधियों को कुछ कार्यक्रमों से हटाने का फैसला दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
अमेरिका ने भी व्यापार प्रतिबंध की आलोचना की
इजरायल में अमेरिका के राजदूत ने ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा के व्यापार प्रतिबंध की आलोचना की है। इससे इस मुद्दे पर पश्चिमी देशों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। एक तरफ यूरोपीय और कनाडाई देश दो-राष्ट्र समाधान और वेस्ट बैंक में बस्ती विस्तार रोकने पर जोर दे रहे हैं, वहीं अमेरिका का इजरायल के साथ पारंपरिक रणनीतिक संबंध इस विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इजरायल की ओर से यह भी कहा गया है कि अमेरिका की गाजा शांति योजना में ब्रिटेन को भागीदार नहीं बनाया जाएगा। इस तरह वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को लेकर शुरू हुआ व्यापारिक विवाद अब कूटनीतिक रिश्तों और क्षेत्रीय राजनीति पर भी असर डालने लगा है।