कनाडा ने अमेरिकी सामान पर लगाया 15 से 50% तक टैरिफ; कार्नी बोले- चुप बैठने की कीमत ज्यादा

कनाडा का ताजा फैसला अमेरिका द्वारा पिछले महीने कनाडाई सामान के करीब 20 अरब डॉलर के आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद आया है। दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन किसी ठोस समाधान तक नहीं पहुंचा जा सका।;

Update: 2026-09-09 06:40 GMT

ओटावा : अमेरिका और कनाडा के बीच करीब डेढ़ साल से जारी व्यापारिक तनाव अब एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ के जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर 15 से 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लागू कर दिया है। कनाडा के ये जवाबी टैरिफ मंगलवार आधी रात से प्रभावी हो गए। इसके साथ ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच चल रहा ट्रेड वॉर नए चरण में पहुंच गया है।

अमेरिका के 50% टैरिफ का कनाडा ने दिया जवाब

कनाडा का ताजा फैसला अमेरिका द्वारा पिछले महीने कनाडाई सामान के करीब 20 अरब डॉलर के आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद आया है। दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन किसी ठोस समाधान तक नहीं पहुंचा जा सका। इसके बाद वॉशिंगटन ने शुल्क बढ़ाने का फैसला किया। अब कनाडा ने भी लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों को अपने जवाबी टैरिफ के दायरे में शामिल किया है। नए शुल्क का असर कई तरह के उत्पादों पर पड़ेगा। इनमें स्टील, फर्नीचर, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई वस्तुएं शामिल हैं।

प्रधानमंत्री कार्नी ने बताया जरूरी कदम

टैरिफ लागू होने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वीडियो संदेश जारी कर सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि देश के पास आगे बढ़ने और आर्थिक प्रगति करने के लिए जरूरी संसाधन मौजूद हैं। कार्नी ने संकेत दिया कि सरकार अमेरिकी व्यापारिक दबाव के सामने पीछे हटने के बजाय अपने हितों की रक्षा करने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बदलाव की कीमत जरूर चुकानी पड़ेगी, लेकिन निष्क्रिय बने रहने की कीमत उससे कहीं ज्यादा हो सकती है। प्रधानमंत्री ने मौजूदा स्थिति को कनाडा के लिए गंभीर चुनौती के तौर पर पेश किया और संकेत दिया कि सरकार अमेरिकी नीतियों के दबाव में अपनी व्यापारिक रणनीति बदलने के लिए तैयार नहीं है।

दोनों देशों के बीच बातचीत भी ठप

कनाडाई सरकार से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक फिलहाल दोनों देशों के बीच मंत्री स्तर या वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के स्तर पर बातचीत नहीं हो रही है। इससे व्यापार विवाद के जल्द सुलझने की संभावनाओं को झटका लगा है। कनाडा का मानना है कि जवाबी टैरिफ के जरिए अमेरिका पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है। सरकार की रणनीति यह है कि अमेरिकी कारोबार और उद्योगों पर भी शुल्क का असर महसूस हो, ताकि वॉशिंगटन पर बातचीत के लिए दबाव बढ़े।

अमेरिकी राज्यों में असर की उम्मीद

कनाडा की रणनीति का एक अहम पहलू अमेरिकी घरेलू राजनीति भी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जवाबी टैरिफ का असर अमेरिका के उन राज्यों के कारोबार पर पड़ेगा, जहां व्यापार और औद्योगिक गतिविधियां राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। मिशिगन और ओहियो जैसे राज्यों को इस संदर्भ में खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन राज्यों में उद्योगों और कारोबार पर पड़ने वाला अतिरिक्त लागत का दबाव राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकता है। कनाडा उम्मीद कर रहा है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले व्यापारिक दबाव का राजनीतिक असर भी दिखाई दे।

ट्रेड वॉर का असर दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर

अमेरिका और कनाडा लंबे समय से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। ऐसे में लगातार बढ़ते टैरिफ का असर केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनियों के लिए आयात लागत बढ़ सकती है, सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कुछ उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। ट्रेड वॉर लंबा खिंचने पर दोनों देशों के उद्योगों को वैकल्पिक बाजार और सप्लायर तलाशने पड़ सकते हैं। इससे कारोबारी अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है। फिलहाल कनाडा के जवाबी कदम ने अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद को और जटिल बना दिया है। बातचीत का रास्ता बंद रहने और दोनों पक्षों के टैरिफ बढ़ाने से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में दोनों सरकारें समझौते की ओर लौटती हैं या शुल्कों की लड़ाई और लंबी होती है।

Tags:    

Similar News