यरुशलम/वाशिंगटन। गाजा को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक तालमेल में एक असामान्य दरार सामने आई है। इजरायल ने गाजा के भविष्य से जुड़े अमेरिकी प्रस्ताव और उसके लिए गठित कार्यकारी बोर्ड की संरचना पर खुला एतराज जताया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने शनिवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इस सप्ताह की गई घोषणा इजरायल के साथ किसी भी प्रकार के समन्वय के बिना की गई और यह इजरायली सरकार की घोषित नीति के विपरीत है। इस बयान को अमेरिका-इजरायल संबंधों में एक दुर्लभ सार्वजनिक असहमति के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब गाजा युद्ध और संघर्षविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तेज है।
इजरायल ने क्यों जताई आपत्ति?
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका द्वारा गठित गाजा कार्यकारी बोर्ड की संरचना पर इजरायल को गंभीर आपत्ति है। हालांकि बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बोर्ड का कौन-सा पहलू इजरायल की नीति से सीधे टकराता है, लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि इसकी मुख्य वजह तुर्किए की भागीदारी है। व्हाइट हाउस द्वारा घोषित इस बोर्ड में तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल किया गया है। इजरायल लंबे समय से गाजा में तुर्किए की किसी भी औपचारिक या अनौपचारिक भूमिका का विरोध करता रहा है। अंकारा और हमास के बीच रिश्तों को लेकर इजरायल पहले भी कड़ी आपत्ति जताता रहा है, और इसी पृष्ठभूमि में तुर्किए की मौजूदगी को वह अपने सुरक्षा हितों के खिलाफ मानता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री से उठाया जाएगा मुद्दा
इजरायल के बयान में कहा गया है कि विदेश मंत्री गिडोन सार इस मुद्दे को सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाएंगे। इससे संकेत मिलता है कि इजरायल इस मसले को सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बनाने की तैयारी में है। हालांकि, इजरायली पक्ष ने यह भी साफ किया है कि वह अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को कमजोर नहीं करना चाहता, लेकिन गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना परामर्श के फैसले उसे स्वीकार्य नहीं हैं।
गाजा कार्यकारी बोर्ड में कौन-कौन शामिल?
अमेरिका द्वारा घोषित गाजा कार्यकारी बोर्ड में कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय हस्तियों को शामिल किया गया है। इस बोर्ड में संयुक्त राष्ट्र की मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया की विशेष समन्वयक सिग्रिड काग को भी जगह दी गई है। इसके अलावा एक इजरायली-साइप्रट उद्योगपति याकिर गैबे और संयुक्त अरब अमीरात की अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री रीम अल-हाशिमी भी बोर्ड का हिस्सा हैं। यह समिति गाजा में प्रस्तावित अस्थायी शासन की निगरानी करेगी और ट्रंप प्रशासन द्वारा पेश की गई युद्ध समाप्ति योजना के दूसरे चरण को लागू करने में अहम भूमिका निभाएगी।
अमेरिकी योजना का दूसरा चरण
इस सप्ताह वाशिंगटन ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी कि गाजा के लिए अमेरिकी मसौदा संघर्षविराम योजना अब दूसरे और सबसे कठिन चरण में प्रवेश कर रही है। इस चरण के तहत एक अंतरिम, तकनीकी फलस्तीनी प्रशासन के गठन की परिकल्पना की गई है, जो गाजा के नागरिक प्रशासन को संभालेगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य गाजा में स्थिरता बहाल करना, मानवीय सहायता का प्रभावी वितरण सुनिश्चित करना और भविष्य में स्थायी राजनीतिक समाधान की जमीन तैयार करना है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ और ट्रंप की भूमिका
गाजा से जुड़े इस पूरे ढांचे के शीर्ष पर तथाकथित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इस बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, वरिष्ठ कारोबारी स्टीव विटकाफ और ट्रंप के दामाद व पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल हैं। इसके अलावा बोर्ड में विश्व बैंक के भारतीय-अमेरिकी अध्यक्ष अजय बंगा, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, निजी इक्विटी फर्म अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन और अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल को भी शामिल किया गया है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि यह विविधतापूर्ण संरचना गाजा के पुनर्निर्माण, वित्तीय सहायता और राजनीतिक स्थिरता के लिए वैश्विक समर्थन जुटाने में मदद करेगी।
सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल
गाजा में सुरक्षा और आतंकवाद-मुक्त माहौल सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) की भी घोषणा की है। अमेरिकी विशेष अभियान कमान सेंट्रल के कमांडर मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इस बल का कमांडर नियुक्त किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह बल गाजा में अस्थायी प्रशासन के दौरान सुरक्षा ढांचे को संभालेगा और किसी भी सशस्त्र समूह की वापसी को रोकने में मदद करेगा।
पूरी योजना पर सवाल
व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि आने वाले हफ्तों में अतिरिक्त कार्यकारी बोर्ड और गाजा कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों के नामों की घोषणा की जाएगी। इसी बीच, इजरायल की आपत्तियों ने इस पूरी योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और इजरायल के बीच यह मतभेद गहराते हैं, तो गाजा के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय पहल और जटिल हो सकती है। वहीं, अमेरिका के लिए यह संतुलन बनाना चुनौती होगा कि वह अपने प्रमुख सहयोगी इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को भी ध्यान में रखे और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को भी साथ लेकर चले। फिलहाल, गाजा को लेकर अमेरिकी योजना और इजरायली आपत्तियों के बीच बढ़ता यह तनाव आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की कूटनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।