ईरानी अधिकारी के मुताबिक, हिंसा के दौरान मारे गए लोगों में आम प्रदर्शनकारी भी हैं और सुरक्षा एजेंसियों के कर्मी भी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कुल मृतकों में कितने नागरिक थे और कितने पुलिस या अन्य सुरक्षा बलों से जुड़े लोग। अधिकारी ने कहा कि सरकार इन घटनाओं को बेहद गंभीरता से ले रही है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सरकारी बयान में इन मौतों के लिए तथाकथित ‘आतंकवादी तत्वों’ को जिम्मेदार ठहराया गया है। अधिकारी का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में हिंसक समूह सक्रिय हो गए, जिन्होंने हालात को बिगाड़ दिया। सरकार का दावा है कि इन तत्वों ने आम जनता और सुरक्षाबलों, दोनों को निशाना बनाया, जिससे जानमाल का भारी नुकसान हुआ।
इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत ईरान की खराब आर्थिक स्थिति के कारण हुई। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, मुद्रा की गिरती कीमत और रोजमर्रा की जरूरतों की कमी से आम जनता में गुस्सा लंबे समय से पनप रहा था। हालिया विरोध प्रदर्शनों को पिछले तीन सालों में सरकार के सामने आई सबसे बड़ी अंदरूनी चुनौती माना जा रहा है।
यह अशांति ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहा है। बीते साल अमेरिका और इजरायल से जुड़े सैन्य हमलों और कूटनीतिक टकरावों के बाद ईरान पर प्रतिबंधों और दबावों का असर उसकी अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकट और बाहरी दबाव, दोनों ने मिलकर हालात को विस्फोटक बना दिया है।
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सत्ता में रही ईरान की सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह प्रदर्शनों को लेकर दोहरी नीति अपना रही है। एक ओर सरकार यह मान रही है कि आर्थिक परेशानियों को लेकर लोगों का आक्रोश जायज है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों के जरिए प्रदर्शनों को सख्ती से कुचलने की कार्रवाई भी की जा रही है।
ईरान सरकार लगातार इन विरोध प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहरा रही है। सरकारी बयान में कहा गया है कि आम जनता के विरोध को विदेशी ताकतों द्वारा प्रायोजित आतंकी समूहों ने हाईजैक कर लिया है। सरकार का दावा है कि इन तत्वों का मकसद देश में अस्थिरता फैलाना है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने विदेशी राजनयिकों के साथ हुई एक बैठक में कहा कि सरकार के पास ऐसे कई सबूत हैं, जो यह दिखाते हैं कि अमेरिका और इजरायल की भूमिका इस अशांति के पीछे रही है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
पिछले एक हफ्ते में रात के समय प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इनमें गोलीबारी, जलते हुए वाहन और इमारतों को आग के हवाले किए जाने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं।
सरकार द्वारा इंटरनेट बंद करने और अन्य संचार प्रतिबंध लगाए जाने के कारण जमीनी हालात की पूरी जानकारी सामने नहीं आ पा रही है। इससे पहले एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने सैकड़ों मौतों की पुष्टि करते हुए यह भी कहा था कि हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन और बड़ी संख्या में मौतों के दावों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार हालात को कैसे संभालती है और क्या किसी राजनीतिक या आर्थिक समाधान की दिशा में कदम उठाए जाते हैं।