ट्रंप ने ठुकराया तेहरान का प्रस्ताव, नवंबर चुनाव के बाद दोबारा हमले के संकेत

ट्रंप ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान को लेकर कड़ा रुख जाहिर किया था। उन्होंने कहा था कि उनके सामने ईरान के साथ ऐसा समझौता करने का विकल्प है, जिससे देश को दोबारा निर्माण का अवसर मिले, या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म करने का रास्ता चुना जाए।;

Update: 2026-09-26 04:09 GMT

तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिरोध और गहराता नजर आ रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से संघर्ष रोकने के लिए पेश किए गए सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। ईरान ने इस प्रस्ताव के तहत सात दिनों के लिए लड़ाई रोकने, इसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत शुरू करने की पेशकश की थी।

ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया था?

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची के मुताबिक, तेहरान ने पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए सात दिन का एक प्लान सामने रखा था। इसमें युद्धविराम के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी। अरागची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों से कहा था कि यह प्रस्ताव इसी वर्ष जून में अमेरिका और ईरान के बीच बनी समझ के अनुरूप है। ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि कूटनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए उसने अमेरिकी पक्ष के सामने अपनी शर्तें और जरूरतें स्पष्ट कर दी हैं।

ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी दोबारा शुरू हो सकती है। यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव पहले से बना हुआ है। ट्रंप ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान को लेकर कड़ा रुख जाहिर किया था। उन्होंने कहा था कि उनके सामने ईरान के साथ ऐसा समझौता करने का विकल्प है, जिससे देश को दोबारा निर्माण का अवसर मिले, या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म करने का रास्ता चुना जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि चुनाव के बाद समझौते की संभावना बन सकती है।

पजेशकियान ने अमेरिका पर लगाए आरोप

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान ने जून में हुए समझौते के लागू नहीं होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है। पजेशकियान के अनुसार, ईरान बातचीत जारी रखने के लिए तैयार था, लेकिन अमेरिका ने कूटनीतिक प्रक्रिया के बजाय सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बंद नहीं किया था और इसके बावजूद उस पर हमला किया गया। पजेशकियान ने ईरान के सर्वोच्च नेता, वैज्ञानिकों, सैन्य कमांडरों और सरकारी अधिकारियों की मौत का भी उल्लेख किया और इसे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जोड़ा।

अरागची बोले- कूटनीति के लिए तैयार है ईरान

जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ बैठक के दौरान अरागची ने कहा कि ईरान ने अमेरिका को कूटनीति आगे बढ़ाने के लिए अपनी आवश्यक शर्तों से अवगत करा दिया है। उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिकी हस्तक्षेप और सैन्य कार्रवाई रोकने को जरूरी बताया। अरागची ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई। उनका कहना था कि बातचीत के दौरान ईरान की ओर से दिखाई गई सद्भावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिम एशिया के इस पूरे संकट में अहम भूमिका निभाता है। ईरान के प्रस्ताव में इसे फिर से खोलने की बात शामिल होने के कारण इस घटनाक्रम का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच सात दिन के प्रस्ताव को लेकर कोई नई कूटनीतिक पहल शुरू होती है या दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव आगे भी जारी रहता है।

Tags:    

Similar News