ईरान में युद्ध के बीच सड़कों पर उतरे हजारों लोग, तेहरान में ‘ईरान के लिए बलिदान’ परेड

तेहरान में इस अभियान को लेकर आईआरजीसी के प्रमुख जनरल हसन हसनजादेह के हवाले से बताया गया है कि करीब छह लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 10 लाख लोगों को सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण देने की योजना है।;

Update: 2026-09-19 05:20 GMT

तेहरान: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच ईरान में सरकार के समर्थन और दुश्मन देशों के खिलाफ विरोध जताने के लिए शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग तेहरान की सड़कों पर उतरे। राजधानी में आयोजित ‘ईरान के लिए बलिदान’ नाम की परेड में लोगों ने सरकार के समर्थन में नारे लगाए और देश के प्रति एकजुटता का संदेश दिया। इस कार्यक्रम में करीब 3.13 लाख लोग शामिल हुए। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत सरकार के कई प्रमुख नेता भी कार्यक्रम में पहुंचे।

राष्ट्रपति ने एकजुटता का दिया संदेश

परेड के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने ईरान के लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश और मातृभूमि के लिए लोग जीवन बलिदान करने को तैयार हैं। राष्ट्रपति ने दुश्मन को हतोत्साहित करने के लिए देशवासियों के बीच एकता और भाईचारे को जरूरी बताया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे भी लगाए। ईरानी सरकार इस आयोजन को ऐसे समय में राष्ट्रीय एकता के प्रदर्शन के तौर पर पेश कर रही है, जब देश पर सैन्य और आर्थिक दोनों तरह का दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है।

‘ईरान के लिए बलिदान’ अभियान पर जोर

सरकारी मीडिया पिछले कई दिनों से लोगों से ‘जानफदाये-ए-ईरान’, यानी ‘ईरान के लिए बलिदान’, अभियान में शामिल होने की अपील कर रहा है। सरकार की ओर से इसे देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय एकजुटता से जोड़कर देखा जा रहा है। अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों के पंजीकरण का दावा भी किया गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य मौजूदा संघर्ष के दौरान देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त स्वयंसेवी समर्थन तैयार करना है।

छह लाख लोगों के पंजीकरण का दावा

तेहरान में इस अभियान को लेकर आईआरजीसी के प्रमुख जनरल हसन हसनजादेह के हवाले से बताया गया है कि करीब छह लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 10 लाख लोगों को सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण देने की योजना है। ईरानी पक्ष के अनुसार, ये स्वयंसेवक रिवोल्यूशनरी गार्ड और बासिज मिलिशिया के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल के तौर पर काम कर सकते हैं। हालांकि, अभियान की वास्तविक भागीदारी और इसके संचालन से जुड़े आंकड़े ईरानी अधिकारियों के दावों पर आधारित हैं।

आर्थिक दबाव के बीच सरकार की अपील

ईरान में राष्ट्रीय एकता पर जोर उस समय दिया जा रहा है, जब अमेरिकी सैन्य और आर्थिक कदमों के कारण देश पर दबाव बढ़ने की बात सामने आ रही है। दिए गए विवरण के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी और नए अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को बढ़ाया है। ईरानी सरकार ऐसे माहौल में देश की जनता से एकजुट रहने और संघर्ष के दौरान सरकार के साथ खड़े होने की अपील कर रही है। सरकारी मीडिया में भी अभियान से जुड़े संदेश लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं।

संघर्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक लामबंदी

अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य टकराव ने ईरान के भीतर राजनीतिक और सामाजिक लामबंदी को भी बढ़ाया है। तेहरान की परेड इसी व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें सरकार देश के नागरिकों को मौजूदा परिस्थितियों में एकजुट रहने का संदेश दे रही है। परेड में राष्ट्रपति पेजेशकियान की मौजूदगी भी सरकार की ओर से इस अभियान को दिए जा रहे राजनीतिक महत्व को दर्शाती है। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे पर विशेष जोर दिया।

आगे क्या है सरकार की रणनीति?

ईरान की सरकार अब स्वयंसेवी नेटवर्क को सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त सहयोग के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अधिकारियों की ओर से पंजीकरण और प्रशिक्षण को लेकर जो आंकड़े बताए गए हैं, वे अभियान के बड़े पैमाने को दर्शाने का दावा करते हैं। हालांकि, मौजूदा सैन्य संघर्ष के बीच इस अभियान का वास्तविक स्वरूप और प्रभाव आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल तेहरान की सड़कों पर हुई परेड ने यह संकेत दिया है कि ईरानी सरकार युद्ध के बीच राष्ट्रीय एकता और घरेलू समर्थन को प्रमुखता दे रही है।

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