होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नई रणनीति: जहाजों पर टोल, अमेरिका-इज़राइल पर पाबंदी; ट्रंप की कड़ी चेतावनी से बढ़ा तनाव

ईरानी सरकारी मीडिया IRIB के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के एक सदस्य ने पुष्टि की है कि इस योजना को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। इस नई नीति में कई अहम पहलुओं को शामिल किया गया है जैसे जलडमरूमध्य की सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, पर्यावरण संरक्षण और वित्तीय लेन-देन की स्पष्ट व्यवस्था।

Update: 2026-03-31 04:41 GMT
तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने इस अहम समुद्री मार्ग के प्रबंधन से जुड़ी एक व्यापक योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स (टोल) लगाया जाएगा, साथ ही कुछ देशों के जहाजों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध भी लगाया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में ईरान और अमेरिका-इज़राइल गठबंधन के बीच तनाव चरम पर है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अनिश्चितता बढ़ रही है।

टोल वसूली और सख्त नियमों का खाका

ईरानी सरकारी मीडिया IRIB के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के एक सदस्य ने पुष्टि की है कि इस योजना को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। इस नई नीति में कई अहम पहलुओं को शामिल किया गया है जैसे जलडमरूमध्य की सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, पर्यावरण संरक्षण और वित्तीय लेन-देन की स्पष्ट व्यवस्था। सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को टोल का भुगतान ईरान की मुद्रा ‘रियाल’ में करना होगा। इससे ईरान न केवल राजस्व बढ़ाना चाहता है, बल्कि अपनी मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने की भी कोशिश कर रहा है।

किन देशों पर लगेगी पाबंदी?

इस योजना का सबसे सख्त पहलू यह है कि अमेरिका और इज़राइल के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, उन देशों के जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा जो ईरान के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंधों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से राजनीतिक और सामरिक संदेश भी देता है। इससे ईरान यह दिखाना चाहता है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए तैयार है।

ओमान के साथ कानूनी ढांचे पर काम

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस नई व्यवस्था के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने में ओमान की मदद लेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है, इसलिए किसी भी प्रशासनिक या कानूनी व्यवस्था में ओमान की भूमिका अहम मानी जाती है। यह सहयोग इस योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैधता दिलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला तेल एशिया, यूरोप और अन्य हिस्सों तक पहुंचाने के लिए यह मार्ग बेहद जरूरी है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध, टोल या सैन्य नियंत्रण सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका का पलटवार: ‘नियंत्रण वापस लेंगे’

ईरान के इस कदम पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी तीखी रही है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका इस जलडमरूमध्य पर “फिर से अपना नियंत्रण स्थापित करेगा।” उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ देश ईरान के साथ अलग-अलग समझौते करके इस मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका जल्द ही बहुराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के जरिए वहां “आवाजाही की स्वतंत्रता” सुनिश्चित करेगा। यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका इस मुद्दे को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सैन्य और रणनीतिक स्तर पर भी देख रहा है।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत व्यापार के लिए नहीं खोला, तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका ईरान के बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल के कुओं और खार्ग द्वीप जैसे अहम ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर जल्द कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के नागरिक ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इस तरह की भाषा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे संभावित सैन्य टकराव के संकेत मिलते हैं।

वैश्विक असर की आशंका

विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान अपनी योजना को पूरी तरह लागू करता है और अमेरिका इसके जवाब में सख्त कदम उठाता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में उछाल, आपूर्ति में बाधा और समुद्री व्यापार में अनिश्चितता जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।


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