वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान पर दबाव बनाए रखने की कीमत अमेरिकी नागरिकों को महंगे तेल के रूप में चुकानी पड़ सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ईरान की उन शर्तों से नाराज हैं, जिनके तहत तेहरान होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने से पहले अमेरिका से कई रियायतें चाहता है। ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
होर्मुज को लेकर बढ़ता जा रहा गतिरोध
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फिलहाल ठप है। जून में सामने आए शुरुआती समझौते की दिशा में दोनों देशों के दोबारा आगे बढ़ने की संभावना भी फिलहाल कमजोर नजर आ रही है। इस गतिरोध का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां जहाजों की आवाजाही में आई कमी ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की तुलना में अब बेहद कम जहाज इसे पार कर रहे हैं। कुछ जहाज ट्रांसपोंडर बंद करके भी आवाजाही कर रहे हैं, जिससे उनके लिए जोखिम और बढ़ जाता है।
ट्रंप बोले- ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी रुख स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है, भले ही इसके कारण कुछ समय के लिए ऊर्जा की कीमतों पर असर क्यों न पड़े। इसी संदर्भ में ट्रंप ने अमेरिकी जनता को महंगे तेल की संभावित कीमत के लिए तैयार रहने का संकेत दिया है।
ईरान ने कहा- स्ट्रेट खोलना हमारा अधिकार
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के दबाव को खारिज करते हुए अपना रुख और कड़ा कर दिया है। ईरानी उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलना या बंद करना ईरान के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने अमेरिका पर जमीनी वास्तविकता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। गरीबाबादी के मुताबिक, केवल सोशल मीडिया पोस्ट, विमानवाहक पोत, आदेश या राजनीतिक भाषणों के जरिए होर्मुज स्ट्रेट को सामान्य नहीं किया जा सकता। ईरान का संदेश साफ है कि वह अमेरिकी दबाव में अपनी शर्तों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
बातचीत को लेकर भी तेहरान का रुख सख्त
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर किसी तत्काल पहल से इनकार किया है। उनका कहना है कि तेहरान ने अमेरिका के साथ बातचीत फिर शुरू करने का कोई फैसला नहीं किया है। ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यदि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य स्थिति चाहता है तो उसे तेहरान की शर्तों पर विचार करना होगा।
तेल बाजार पर पड़ सकता है बड़ा असर
होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। इस मार्ग से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा जुड़ा है। ऐसे में लंबे समय तक समुद्री यातायात प्रभावित रहने पर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। अगर संकट लंबा खिंचता है तो इसका असर ईंधन की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ने की आशंका है। यही वजह है कि दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर टिकी हुई है।