काहिरा : Gaza Peace Plan: गाजा में जारी संघर्ष के बीच युद्धविराम और शांति की कोशिशों को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूतों ने मिस्र, कतर और तुर्किए के मध्यस्थों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की है। इस बैठक में हमास के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे और अहम बना दिया है। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी शांति योजना पर अपनी असहमति जाहिर कर चुके हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में ट्रंप के दामाद और पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर, स्टीव विटकाफ और निकोलाई म्लाडेनोव शामिल रहे। बैठक में हमास की ओर से वरिष्ठ नेता खलील अल-हैय्या मौजूद थे, जबकि मिस्र की ओर से खुफिया प्रमुख हसन राशद ने हिस्सा लिया। बातचीत का मुख्य उद्देश्य गाजा में संघर्ष समाप्त करने के लिए प्रस्तावित शांति योजना पर आगे की राह तलाशना और सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करना बताया जा रहा है।
नेतन्याहू के रुख के बाद बढ़ी बातचीत की अहमियत
अमेरिकी दूतों और मध्यस्थ देशों के बीच यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि नेतन्याहू पिछले सप्ताह ट्रंप की गाजा शांति योजना को अस्वीकार्य बता चुके हैं। इजरायल की आपत्तियां खास तौर पर उस प्रस्ताव से जुड़ी बताई जा रही हैं, जिसमें हमास के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने की बात शामिल है। इजरायल का तर्क है कि हमास की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म किए बिना युद्ध रोकना उसके लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती पैदा कर सकता है। इजरायली पक्ष को आशंका है कि युद्धविराम के दौरान हमास दोबारा अपनी ताकत बढ़ा सकता है और भविष्य में इजरायल के खिलाफ हमले की तैयारी कर सकता है।
कुशनर और म्लाडेनोव करेंगे नेतन्याहू से मुलाकात
एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर और निकोलाई म्लाडेनोव सोमवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में अमेरिकी शांति योजना को लेकर इजरायल की आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा होगी। अमेरिका की कोशिश है कि इजरायल और हमास के बीच किसी संभावित समझौते के लिए न्यूनतम साझा आधार तैयार किया जाए। इसके लिए मिस्र, कतर और तुर्किए जैसे मध्यस्थ देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। इन देशों ने पहले भी संघर्ष के दौरान बातचीत और कैदियों की रिहाई से जुड़े प्रयासों में भूमिका निभाई है।
अरब और मुस्लिम देशों ने जताई आपत्ति
नेतन्याहू के रुख को लेकर तुर्किए, पाकिस्तान और इंडोनेशिया समेत पांच अरब देशों ने इजरायली प्रधानमंत्री की आलोचना की है। इन देशों ने गाजा में युद्ध समाप्त करने और मानवीय संकट को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है। वहीं, गाजा में जमीनी स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है। इजरायल की हवाई सैन्य कार्रवाई जारी है। इजरायली सेना ने खान यूनिस और नुसैरत में इस्लामिक जिहाद तथा हमास से जुड़े दो आतंकियों को मार गिराने का दावा किया है। हालांकि, इन दावों पर संबंधित संगठनों की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
शांति प्रयासों के सामने बड़ी चुनौती
ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी योजना तैयार करना है, जिसे इजरायल और हमास दोनों स्वीकार कर सकें। एक तरफ इजरायल अपनी सुरक्षा और हमास की सैन्य क्षमता खत्म करने को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्यस्थ देश युद्धविराम और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। अमेरिकी दूतों की ताजा बैठक और नेतन्याहू के साथ प्रस्तावित वार्ता से यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन अभी शांति योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए इजरायल की सुरक्षा चिंताओं, हमास की मांगों और गाजा के भविष्य को लेकर कई कठिन मुद्दों पर सहमति बनाना बाकी है।