लुइसियाना से ग्रीनलैंड तक: जानें कैसे 13 राज्यों का अमेरिका बना 50 राज्यों का सुपरपावर
पिछले लगभग दो सौ वर्षों में अमेरिका ने कभी खरीद के जरिए, कभी युद्ध के माध्यम से और कभी राजनीतिक दबाव बनाकर अपने क्षेत्रफल का लगातार विस्तार किया। आज का 50 राज्यों वाला संयुक्त राज्य अमेरिका कभी केवल 13 उपनिवेशों तक सीमित था।
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की खुली मांग और इसके विरोध में खड़े यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले ने एक बार फिर अमेरिका के विस्तारवादी इतिहास को वैश्विक बहस के केंद्र में ला दिया है। ट्रंप का यह आक्रामक रुख भले ही मौजूदा दौर में असाधारण लगे, लेकिन अमेरिकी इतिहास पर नजर डालें तो यह कोई नई नीति नहीं है। पिछले लगभग दो सौ वर्षों में अमेरिका ने कभी खरीद के जरिए, कभी युद्ध के माध्यम से और कभी राजनीतिक दबाव बनाकर अपने क्षेत्रफल का लगातार विस्तार किया। आज का 50 राज्यों वाला संयुक्त राज्य अमेरिका कभी केवल 13 उपनिवेशों तक सीमित था। सवाल यह है कि यह बदलाव कैसे हुआ और किन फैसलों ने अमेरिका को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बना दिया।
यूरोपीय शक्तियों की कॉलोनी से अमेरिका की शुरुआत
अमेरिका का इतिहास यूरोपीय साम्राज्यवाद से जुड़ा हुआ है। 15वीं और 16वीं सदी में जब यूरोप की बड़ी ताकतें स्पेन, ब्रिटेन और फ्रांस दुनिया के नए इलाकों पर कब्जे की होड़ में थीं, तब उत्तरी अमेरिका उनका बड़ा निशाना बना। सबसे पहले स्पेन ने अमेरिका के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में अपनी कॉलोनियां स्थापित कीं। इसके बाद 16वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटेन ने पूर्वी तट पर कदम रखा और धीरे-धीरे 13 उपनिवेश बसा लिए। फ्रांस ने भी मिसिसिपी नदी घाटी और उत्तरी इलाकों में अपना प्रभुत्व कायम किया। 1700 तक आते-आते उत्तरी अमेरिका का अधिकांश हिस्सा इन तीन यूरोपीय शक्तियों के बीच बंट चुका था। यूरोप से आए लोग यहां बसने लगे और मूल अमेरिकी आबादी को धीरे-धीरे हाशिये पर धकेला गया।
ब्रिटिश दमन और आजादी की चिंगारी
इन यूरोपीय ताकतों में ब्रिटेन सबसे प्रभावशाली था। लेकिन उसकी नीतियां अमेरिकी उपनिवेशों में असंतोष पैदा कर रही थीं। ब्रिटिश संसद द्वारा लगाए गए भारी कर, व्यापार पर नियंत्रण और राजनीतिक अधिकारों की कमी ने अमेरिकी जनता को विद्रोह की ओर धकेल दिया। 1760 के दशक से विरोध तेज होने लगा और आखिरकार 1775 में अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ। कई वर्षों तक चले खूनी संघर्ष के बाद 4 जुलाई 1776 को अमेरिका ने स्वतंत्रता की घोषणा की। हालांकि ब्रिटेन ने औपचारिक रूप से 1783 में पेरिस संधि के जरिए अमेरिका की आज़ादी को मान्यता दी। 1787 में अमेरिकी संविधान तैयार हुआ और 1789 में लागू हुआ। इसी साल 30 अप्रैल को जॉर्ज वाशिंगटन अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने। उस समय अमेरिका केवल 13 राज्यों का एक नया राष्ट्र था।
आजादी के बाद शुरू हुआ विस्तारवाद
स्वतंत्रता के बाद अमेरिका ने वही रास्ता अपनाया, जिससे वह खुद कभी पीड़ित रहा था—विस्तारवाद। नई सरकार का मानना था कि पश्चिम की ओर विस्तार देश की सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए जरूरी है। इसे बाद में “मैनिफेस्ट डेस्टिनी” कहा गया, यानी अमेरिका का यह विश्वास कि उसे पूरे महाद्वीप में फैलना ही है।
लुइसियाना डील: इतिहास का सबसे बड़ा सौदा
1803 में अमेरिका ने फ्रांस से 1.5 करोड़ डॉलर में लुइसियाना क्षेत्र खरीद लिया। यह सौदा अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जाता है। लुइसियाना खरीद से अमेरिका का क्षेत्रफल लगभग तीन गुना बढ़ गया। इसमें आज के कई राज्य जैसे अर्कांसस, मिसौरी, आयोवा, नेब्रास्का और मोंटाना शामिल थे। इस सौदे ने अमेरिका को मिसिसिपी नदी पर नियंत्रण दिलाया और उसे महाद्वीपीय शक्ति बना दिया।
स्पेन से फ्लोरिडा की खरीद
1819 में अमेरिका ने स्पेन से 50 लाख डॉलर में फ्लोरिडा खरीद लिया। यह सौदा एडम्स-ओनिस संधि के तहत हुआ। फ्लोरिडा की खरीद से अमेरिका की दक्षिण-पूर्वी सीमा सुरक्षित हो गई और अटलांटिक तट पर उसकी पकड़ मजबूत हुई।
टेक्सास और मेक्सिको युद्ध
19वीं सदी के मध्य तक अमेरिका की नजर मेक्सिको के क्षेत्रों पर टिक गई। 1845 में टेक्सास को अमेरिका में शामिल कर लिया गया, जो पहले मेक्सिको का हिस्सा था। इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और 1846 में अमेरिका-मेक्सिको युद्ध शुरू हो गया। 1848 में युद्ध समाप्त हुआ और मेक्सिको की हार हुई। इसके बाद अमेरिका ने कैलिफोर्निया, नेवादा, यूटा, एरिज़ोना और न्यू मैक्सिको जैसे विशाल इलाकों पर कब्जा कर लिया। यह अमेरिकी इतिहास का सबसे आक्रामक विस्तार माना जाता है।
सेना के बल पर कब्जे और नरसंहार
अमेरिका के विस्तार की कहानी केवल सौदों और युद्धों तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में उसने सीधे सैन्य बल का इस्तेमाल किया। जो स्थानीय लोग या प्रांत अमेरिकी प्रभुत्व स्वीकार नहीं करते थे, उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ा। कैलिफोर्निया नरसंहार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां अमेरिकी सरकार की नीतियों के चलते हजारों मूल निवासियों की हत्या हुई। इतिहासकारों के अनुसार, यह नरसंहार अमेरिका के विस्तारवादी रवैये का काला अध्याय है।
रूस से अलास्का की खरीद
1867 में अमेरिका ने रूस से 72 लाख डॉलर में अलास्का खरीद लिया। उस समय इस सौदे का मजाक उड़ाया गया और इसे “सीवार्ड्स फॉली” कहा गया। लेकिन बाद में अलास्का में तेल, गैस और खनिज संसाधनों की खोज ने इसे अमेरिका के लिए बेहद लाभदायक साबित किया।
प्रशांत क्षेत्र में विस्तार
19वीं सदी के अंत तक अमेरिका ने प्रशांत महासागर की ओर रुख किया। उसने हवाई द्वीपसमूह पर कब्जा किया और 1898 के स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद प्यूर्टो रिको, गुआम और फिलीपींस उसके नियंत्रण में आ गए। हालांकि फिलीपींस को 1946 में अमेरिका से आज़ादी मिल गई, लेकिन इन क्षेत्रों ने अमेरिका को एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया।
अमेरिका का नक्शा बदलने वाले पांच ऐतिहासिक फैसले
1803 – फ्रांस से लुइसियाना की खरीद
1819 – स्पेन से फ्लोरिडा की खरीद
1845 – टेक्सास का अमेरिका में विलय
1848 – मेक्सिको युद्ध के बाद विशाल क्षेत्रों पर कब्जा
1867 – रूस से अलास्का की खरीद
ग्रीनलैंड विवाद और इतिहास की पुनरावृत्ति
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की मांग इसी विस्तारवादी परंपरा की नई कड़ी मानी जा रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज दुनिया बदली हुई है और ऐसे कदम वैश्विक टकराव को जन्म दे सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह रवैया केवल आर्थिक या सामरिक नहीं, बल्कि अमेरिका के पुराने विस्तारवादी डीएनए का हिस्सा है, वही डीएनए जिसने 13 राज्यों को 50 राज्यों वाले सुपरपावर में बदल दिया।
विस्तार, शक्ति और प्रभुत्व
ग्रीनलैंड विवाद केवल एक द्वीप की कहानी नहीं है, बल्कि यह अमेरिका के उस लंबे इतिहास की याद दिलाता है, जिसमें विस्तार, शक्ति और प्रभुत्व हमेशा केंद्र में रहे हैं। सवाल यह है कि क्या 21वीं सदी की दुनिया में यह नीति उतनी ही कारगर रहेगी, जितनी 19वीं सदी में थी।