ईरान के परमाणु भंडार पर कब्जे की तैयारी?: अमेरिका-इस्राइल उतार सकता है विशेष बल, रिपोर्ट में दावा

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के परमाणु भंडार को सुरक्षित करने का यह संभावित मिशन मौजूदा युद्ध के अगले चरण में किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी यह केवल एक रणनीतिक विकल्प के रूप में विचाराधीन है और इसे तभी लागू किया जाएगा जब युद्ध की परिस्थितियां उस दिशा में आगे बढ़ेंगी।

Update: 2026-03-08 08:56 GMT

वॉशिंगटन/तेल अवीव: US Iran War: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका और इस्राइल ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करने के लिए विशेष सैन्य अभियान की संभावना पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस (Axios) की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े चार सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दोनों देश संभावित रूप से विशेष बलों की तैनाती जैसे विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। यह चर्चा ऐसे समय सामने आई है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है और क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार गहरा रहा है।

युद्ध के अगले चरण में ऑपरेशन

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के परमाणु भंडार को सुरक्षित करने का यह संभावित मिशन मौजूदा युद्ध के अगले चरण में किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी यह केवल एक रणनीतिक विकल्प के रूप में विचाराधीन है और इसे तभी लागू किया जाएगा जब युद्ध की परिस्थितियां उस दिशा में आगे बढ़ेंगी। बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों और वहां मौजूद संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित नियंत्रण में लेना होगा।

60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम बना चिंता का कारण

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और इस्राइल की चिंता का मुख्य कारण ईरान के पास मौजूद लगभग 450 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम है। परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम को अपेक्षाकृत कम समय में 90 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा सकता है, जो परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक स्तर माना जाता है। इसी वजह से अमेरिका और इस्राइल इसे संभावित वैश्विक सुरक्षा खतरे के रूप में देख रहे हैं।

ट्रंप पहले ही दे चुके हैं सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे पूरे पश्चिम एशिया में रणनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है। इसी कारण अमेरिका और इस्राइल इस मुद्दे को अपनी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा मानते हैं।

ईरान की जमीन पर उतर सकते हैं सैनिक

एक्सियोस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि इस तरह का मिशन शुरू किया जाता है, तो अमेरिकी या इस्राइली सैनिकों को सीधे ईरान की जमीन पर उतरना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार सैनिकों को ईरान के उन कड़ी सुरक्षा वाले भूमिगत परमाणु ठिकानों तक पहुंचना होगा जहां संवर्धित यूरेनियम रखा गया है। यह मिशन तकनीकी और सैन्य दृष्टि से बेहद जटिल माना जा रहा है, क्योंकि इन परमाणु ठिकानों को मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और भूमिगत संरचनाओं के जरिए सुरक्षित रखा गया है।

अमेरिका या इस्राइल, कौन करेगा ऑपरेशन?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यदि यह मिशन शुरू होता है तो उसे अमेरिका अकेले अंजाम देगा, इस्राइल करेगा या दोनों देश मिलकर संयुक्त अभियान चलाएंगे। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन के लिए दोनों देशों के बीच उच्च स्तर की सैन्य और खुफिया समन्वय की आवश्यकता होगी। साथ ही इस मिशन के संभावित राजनीतिक और सैन्य परिणामों को लेकर भी गहन विचार किया जा रहा है।

क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका या इस्राइल वास्तव में ईरान के भीतर सैन्य अभियान शुरू करते हैं तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। ईरान पहले ही अपने परमाणु कार्यक्रम को राष्ट्रीय संप्रभुता और वैज्ञानिक विकास का हिस्सा बताता रहा है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है। ऐसी स्थिति में ईरान की जमीन पर किसी विदेशी सैन्य अभियान से बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष भड़कने की आशंका भी जताई जा रही है।

वैश्विक सुरक्षा पर असर

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका, इस्राइल और पश्चिमी देशों की चिंताएं नई नहीं हैं। पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को लेकर लगातार कूटनीतिक और सैन्य रणनीतियां बनती रही हैं। हालांकि यदि विशेष बलों की तैनाती जैसी योजना वास्तव में लागू होती है, तो यह पश्चिम एशिया के संघर्ष को एक नए और अधिक गंभीर चरण में ले जा सकती है। फिलहाल यह योजना केवल चर्चा के स्तर पर बताई जा रही है, लेकिन इससे यह स्पष्ट है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इस्राइल की चिंता लगातार बढ़ रही है।

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