ग्रीनलैंड ही नहीं, ये 2 और देश भी निशाने पर ! ट्रंप ने दिखाया अमेरिका का नया नक्शा, यूरोप में मची हलचल
ट्रुथ सोशल पर साझा की गई एक एआइ तस्वीर में अमेरिकी मानचित्र को बदले हुए रूप में दिखाया गया है, जिसमें ग्रीनलैंड के साथ-साथ वेनेजुएला और कनाडा को भी अमेरिका के हिस्से के तौर पर दर्शाया गया है।
वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक और विस्तारवादी रुख एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंदी बनाने की बात हो या डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की जिद—ट्रंप अपने बयानों और कदमों से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लगातार झकझोर रहे हैं। अब इस कड़ी में उन्होंने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर एआइ से निर्मित तस्वीरें साझा कर नई हलचल पैदा कर दी है।
एआइ तस्वीरें और विवाद
ट्रुथ सोशल पर साझा की गई एक एआइ तस्वीर में अमेरिकी मानचित्र को बदले हुए रूप में दिखाया गया है, जिसमें ग्रीनलैंड के साथ-साथ वेनेजुएला और कनाडा को भी अमेरिका के हिस्से के तौर पर दर्शाया गया है। दूसरी पोस्ट में ट्रंप नाटो देशों के नेताओं के साथ ओवल ऑफिस में बैठे नजर आते हैं, जबकि एक अन्य तस्वीर में वे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ ग्रीनलैंड में अमेरिकी झंडा फहराते हुए दिखते हैं। इस तस्वीर में एक मील का पत्थर भी दिखाया गया है, जिस पर लिखा है—“ग्रीनलैंड अमेरिकी क्षेत्र, स्थापित 2026।” इन तस्वीरों को लेकर जहां ट्रंप समर्थक इसे ‘मजबूत नेतृत्व’ का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता की खुली अवहेलना है।
वेनेजुएला और कनाडा पर सख्त संकेत
वेनेजुएला को लेकर ट्रंप का रुख पहले भी तीखा रहा है। उन्होंने मादुरो को बंदी बनाने की बात कहने के बाद यह भी कहा था कि अमेरिका वहां केवल सुरक्षित सत्ता परिवर्तन तक ही भूमिका निभाएगा। लेकिन नई एआइ तस्वीरों में वेनेजुएला को अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाना इस बयान से उलट माना जा रहा है। कनाडा के संबंध में ट्रंप पहले सुझाव दे चुके हैं कि वह अमेरिका का 51वां राज्य बन जाए। हालांकि, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने चुनाव जीतने के बाद इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि इच्छाओं और वास्तविकता के बीच फर्क समझना जरूरी है और कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा।
ग्रीनलैंड पर टकराव
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है, यदि वे ग्रीनलैंड को अमेरिका को बेचने पर सहमत नहीं होते। ट्रंप की चेतावनी के मुताबिक, अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो एक फरवरी 2026 से 10 प्रतिशत और एक जून 2026 से 25 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाए जाएंगे। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने साफ कहा है कि टैरिफ की धमकियों से उनका रुख नहीं बदलेगा। डेनमार्क की यूरोपीय मामलों की मंत्री मैरी बियरे ने इन धमकियों को बेहद अनुचित बताते हुए कहा कि यूरोप को और अधिक मजबूत और स्वतंत्र बनने की जरूरत है।
डिएगो गार्सिया और चागोस विवाद
ट्रंप ने हिंद महासागर स्थित रणनीतिक द्वीप डिएगो गार्सिया को लेकर भी नया विवाद खड़ा कर दिया है। ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप समूह को मारीशस को लौटाने के फैसले पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। ट्रंप ने कहा कि डिएगो गार्सिया जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने को छोड़ना मूर्खतापूर्ण है और इससे चीन व रूस जैसी शक्तियों को फायदा होगा। यह उल्लेखनीय है कि पिछले साल ब्रिटेन और मारीशस के बीच हुए इस समझौते का भारत और अमेरिका दोनों ने समर्थन किया था। लेकिन अब ट्रंप के रुख में बदलाव ने सहयोगी देशों को भी असहज कर दिया है।
यूरोप की तीखी प्रतिक्रिया
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन ने ग्रीनलैंड को लेकर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ को ‘लंबे समय से सहयोगी देशों के बीच एक बड़ी गलती’ बताया है। उन्होंने ट्रंप की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मित्र देश हाथ मिलाते हैं, तो उसका कोई अर्थ होना चाहिए। यूरोपीय संघ संभावित जवाबी कदमों पर विचार कर रहा है। इनमें नए टैरिफ, अमेरिका-ईयू व्यापार समझौते का निलंबन और तथाकथित ‘ट्रेड बजूका’ जैसे सख्त आर्थिक उपाय शामिल हैं, जिनके तहत दबाव बनाने वाले व्यक्तियों या संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
बाजारों में असर
ट्रंप के इन बयानों और एआइ पोस्टों का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी साफ दिखा। यूरोप और एशिया के प्रमुख बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि भारतीय शेयर बाजार भी इस अनिश्चितता से अछूते नहीं रहे। निवेशकों में डर है कि यदि व्यापार युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बढ़े, तो वैश्विक आर्थिक स्थिरता को गंभीर झटका लग सकता है।
नई विश्व व्यवस्था की आहट
यूरोपीय नेताओं का कहना है कि ट्रंप की भाषा और नीतियां एक नई विश्व व्यवस्था की ओर इशारा कर रही हैं, जहां ताकत और दबाव कूटनीति का प्रमुख हथियार बनते जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह रणनीति अमेरिका को दीर्घकालिक लाभ दिलाएगी या सहयोगी देशों के साथ रिश्तों में स्थायी दरार पैदा करेगी। फिलहाल, ट्रंप के आक्रामक रुख ने दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को अस्थिर कर दिया है।