Crude Oil Price: क्रूड ऑयल फिर 100 डॉलर के पार, पेट्रोल-डीजल और LPG पर पड़ सकता है असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी अचानक नहीं आई है। पिछले करीब एक महीने में ब्रेंट क्रूड के दाम लगभग 22% बढ़ चुके हैं। 10 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गया है।;

Update: 2026-09-09 10:33 GMT

नई दिल्ली: Crude Oil : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। बुधवार, 9 सितंबर को ब्रेंट क्रूड के दाम करीब 2.25% बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए। इससे पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। तेल बाजार में इस तेजी की प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव और फारस की खाड़ी से जुड़े अहम समुद्री मार्गों पर बढ़ी असुरक्षा को माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर आने वाले दिनों में भारत पर भी पड़ सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ LPG की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव से तेल बाजार में हलचल

कच्चे तेल की कीमतों में ताजा तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव अहम कारण है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मंगलवार देर रात दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच क्रूड ऑयल टैंकरों को नष्ट किया है। अमेरिका के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में की गई। सैन्य तनाव बढ़ने की खबरों के साथ ही बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई दिया।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट क्यों अहम?

तेल बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। करीब 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक तेल कारोबार के लिए इसे बेहद महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। मौजूदा तनाव के बीच इस मार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम कारोबार का करीब 20% हिस्सा इस समुद्री मार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश भी अपने निर्यात के लिए इस रूट पर काफी निर्भर हैं। भारत के लिए भी यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल और लगभग 54% LNG इसी समुद्री मार्ग से प्राप्त करता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का लंबा व्यवधान भारतीय ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

एक महीने में 22% महंगा हुआ कच्चा तेल

क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी अचानक नहीं आई है। पिछले करीब एक महीने में ब्रेंट क्रूड के दाम लगभग 22% बढ़ चुके हैं। 10 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गया है। इससे पहले 24 जुलाई को भी कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंची थी। यानी कुछ ही समय के अंतराल में तेल बाजार दोबारा इस महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर चला गया है।

भारत में पेट्रोल-डीजल पर क्या होगा असर?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर भारतीय ईंधन बाजार पर पड़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में लंबे समय तक महंगा क्रूड रहने पर तेल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इससे पहले मई में सरकारी तेल कंपनियों IOC, BPCL और HPCL ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम किस्तों में बढ़ाए थे। दोनों ईंधनों की कीमत में कुल मिलाकर करीब ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। देश के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से 90% से ज्यादा पर इन तीन सरकारी तेल कंपनियों का नियंत्रण है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की तेजी लंबे समय तक जारी रहती है, तो घरेलू ईंधन कीमतों को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है।

LPG की कीमतों पर भी बढ़ सकता है दबाव

कच्चे तेल और ऊर्जा कीमतों में लगातार तेजी का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रह सकता। LPG और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की लागत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि घरेलू बाजार में कीमतें तय करने में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ सरकार की नीतियां और अन्य कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल की आवाजाही पर है। अगर सैन्य तनाव बढ़ता है या इस अहम समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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