भारत को 'कोहिनूर' लौटाएगा ब्रिटेन?: किंग चार्ल्स से न्यूयॉर्क के मेयर की अपील; जोहरान ममदानी के बयान से चर्चाएं तेज
बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ममदानी से पूछा गया कि वे किंग चार्ल्स से क्या कहेंगे, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कोहिनूर का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने कहा कि यह हीरा केवल एक बहुमूल्य रत्न नहीं है, बल्कि भारत के इतिहास, उसके गौरव और औपनिवेशिक काल में हुए शोषण का प्रतीक है।;
न्यूयॉर्क। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी के एक बयान ने कोहिनूर हीरे को लेकर दशकों पुराने विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि उन्हें ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने का अवसर मिलता है, तो वे उनसे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की मांग करेंगे। उनके इस बयान को न केवल एक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसे इतिहास और न्याय से जुड़े एक बड़े मुद्दे के रूप में भी समझा जा रहा है।
#WATCH | "If I were to speak to the King separately from that, I would probably encourage him to return the Kohinoor diamond," says New York Mayor Zohran Mamdani on meeting King Charles III during the wreath-laying ceremony at the 9/11 memorial in New York.
— ANI (@ANI) April 29, 2026
(Source: Mayor Zohran… pic.twitter.com/EExmI1ypqA
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया मुद्दा
बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ममदानी से पूछा गया कि वे किंग चार्ल्स से क्या कहेंगे, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कोहिनूर का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने कहा कि यह हीरा केवल एक बहुमूल्य रत्न नहीं है, बल्कि भारत के इतिहास, उसके गौरव और औपनिवेशिक काल में हुए शोषण का प्रतीक है। ममदानी का मानना है कि इस तरह की ऐतिहासिक धरोहरों को उनके मूल देश को लौटाना न्यायसंगत होगा।
9/11 स्मारक पर मुलाकात का जिक्र
ममदानी ने यह भी बताया कि उनकी किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात न्यूयॉर्क में 9/11 स्मारक पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा, “अगर मुझे राजा से अलग से बातचीत करने का मौका मिलता, तो मैं उन्हें कोहिनूर हीरा लौटाने के लिए प्रोत्साहित करता।” उनका यह बयान उस समय आया है जब किंग चार्ल्स अमेरिका दौरे पर हैं और 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।
कोहिनूर का ऐतिहासिक सफर
कोहिनूर हीरा दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और विवादित रत्नों में से एक है। इसका इतिहास भारत से जुड़ा हुआ है। यह हीरा आंध्र प्रदेश के कोल्लूर खान से निकला था और समय-समय पर कई भारतीय शासकों, मुगल सम्राटों और सिख साम्राज्य के पास रहा। लेकिन 1849 में द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे अपने कब्जे में ले लिया। उस समय पंजाब के महाराजा दलीप सिंह महज 10 वर्ष के थे और उनसे एक संधि पर हस्ताक्षर करवाकर यह हीरा ब्रिटेन ले जाया गया।
ब्रिटिश ताज का हिस्सा बना कोहिनूर
ब्रिटेन पहुंचने के बाद कोहिनूर को शाही आभूषणों में शामिल कर लिया गया। वर्तमान में यह लंदन के टॉवर में रखा हुआ है और ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है। भारत लंबे समय से इस हीरे को अपनी सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए वापस मांगता रहा है। भारतीय पक्ष का तर्क है कि यह हीरा उपनिवेशवाद के दौरान अन्यायपूर्ण तरीके से लिया गया था, इसलिए इसे लौटाया जाना चाहिए।
भारत और अन्य देशों की मांग
केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य देश भी ब्रिटेन और यूरोपीय देशों से अपनी ऐतिहासिक वस्तुओं को वापस करने की मांग करते रहे हैं। इन देशों का मानना है कि औपनिवेशिक काल में जो धरोहरें ली गईं, वे उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं और उन्हें उनके मूल स्थान पर लौटाया जाना चाहिए। कोहिनूर इस बहस का सबसे प्रमुख प्रतीक बन चुका है।
ममदानी का भारत से जुड़ाव
जोहरान ममदानी का भारत से व्यक्तिगत संबंध भी इस बयान को खास बनाता है। उनकी मां, प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मीरा नायर, भारत में जन्मी हैं। ऐसे में ममदानी का यह बयान केवल एक राजनीतिक रुख नहीं, बल्कि उनके पारिवारिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाता है। यही कारण है कि उनके इस बयान को भारत में भी खास ध्यान से देखा जा रहा है।
नई बहस को मिला बल
ममदानी के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या ब्रिटेन को अपने पास मौजूद उन ऐतिहासिक खजानों को लौटाना चाहिए, जो कभी उसके उपनिवेश रहे देशों से लाए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक हीरे का मुद्दा नहीं, बल्कि ऐतिहासिक न्याय और नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न है। कोहिनूर को लेकर यह विवाद आने वाले समय में और तेज हो सकता है, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की आवाजें उठती रहेंगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ब्रिटेन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या कभी यह बहुमूल्य हीरा अपने मूल देश भारत लौट पाएगा या नहीं।