ढाका। बांग्लादेश के दक्षिणी हिस्से चटगांव डिवीजन के फेनी जिले में एक बार फिर हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटना सामने आई है। दागनभुइयां इलाके में रविवार रात 28 वर्षीय हिंदू युवक समीर कुमार दास की पीट-पीटकर और चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने हत्या के बाद उसका ऑटोरिक्शा भी लूट लिया। जानकारी के अनुसार, समीर रविवार शाम करीब 7 बजे रोज़ की तरह ऑटोरिक्शा लेकर घर से निकला था। देर रात तक जब वह घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। रात करीब 2 बजे जगतपुर गांव के एक खेत में स्थानीय लोगों ने उसका शव पड़ा देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
हत्या की पहले से साजिश की आशंका
दागनभुइयां थाने के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि समीर की हत्या में देसी हथियारों और चाकू का इस्तेमाल किया गया। शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि हत्या सुनियोजित हो सकती है। अधिकारी के मुताबिक, शव के पास से ऑटोरिक्शा नहीं मिला, जिससे लूट की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है, लेकिन घटना के कई घंटे बाद तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
23 दिनों में हिंदुओं की सातवीं मौत
समीर कुमार दास की हत्या बांग्लादेश में बीते 23 दिनों के दौरान हिंदू समुदाय से जुड़ी सातवीं मौत की घटना है। इससे पहले 5 जनवरी को नरसिंदी जिले में 40 वर्षीय हिंदू दुकानदार शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने अल्पसंख्यक समुदायों में भय और असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।
चोरी के शक में पीछा, नहर में कूदने से मौत
हिंदू समुदाय से जुड़ी एक और मौत 6 जनवरी को नाओगांव जिले में हुई थी। यहां भंडारपुर गांव के 25 वर्षीय मिथुन सरकार पर कुछ लोगों ने चोरी का आरोप लगाया और उसका पीछा किया। खुद को बचाने की कोशिश में मिथुन पास की एक नहर में कूद गया और लापता हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर सर्विस की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। करीब चार घंटे बाद गोताखोरों की मदद से मिथुन का शव नहर से बरामद किया गया।
जेल में इलाज के अभाव में हिंदू गायक की मौत
बांग्लादेश की एक जेल में बंद हिंदू गायक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता प्रोलॉय चाकी की इलाज के अभाव में मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, 11 जनवरी की रात करीब 9 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई। प्रोलॉय चाकी प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजक और अभिनेता दिवंगत लक्ष्मी दास चाकी के बेटे थे। वे प्रतिबंधित आवामी लीग से जुड़े थे और जिला स्तर पर सांस्कृतिक सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनके समर्थकों का आरोप है कि समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण उनकी जान गई।
सत्तापलट के बाद बिगड़े हालात
लगभग 17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में 2024 के तख्तापलट के बाद से राजनीतिक और सामाजिक हालात अस्थिर बने हुए हैं। इस्लामी संगठनों की बढ़ती सक्रियता के बीच अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू और सूफी मुस्लिम समुदायों पर हमलों में इजाफा देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई सहित अल्पसंख्यक समुदायों की कुल आबादी 10 प्रतिशत से भी कम है। इसके बावजूद हाल के महीनों में इन्हें लगातार हिंसा, धमकियों और संपत्ति के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
चुनाव से पहले बढ़ी सांप्रदायिक हिंसा
बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने देशभर में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि फरवरी में प्रस्तावित राष्ट्रीय चुनाव से पहले सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में तेजी आई है। परिषद के अनुसार, कई मामलों में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होने से ऐसे तत्वों का मनोबल बढ़ रहा है।
भारत ने जताई कड़ी चिंता
भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की है। पिछले सप्ताह भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह बांग्लादेश की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनकी संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों का एक चिंताजनक पैटर्न देख रहे हैं। ऐसी घटनाओं से सख्ती और तुरंत निपटा जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में इन हमलों को व्यक्तिगत रंजिश या राजनीतिक कारण बताकर कमतर आंका जाता है, जिससे कट्टरपंथी तत्वों का हौसला बढ़ता है और अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना और गहरी होती है।
यूनुस ने आरोपों को बताया बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया
हालांकि, बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भारत की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इन आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार हालात को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। फिलहाल, लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और आगामी चुनावों की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।