अमेरिकी प्रतिबंधों की बाघेई ने की आलोचना, बोले- ईरान पर नहीं, यूएन की संप्रभुता पर है हमला
तेहरान, ईरान ने शनिवार को अमेरिका की ओर से लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की और कहा कि इसका नतीजा संयुक्त राष्ट्र आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियाद मानी जाने वाली देशों की संप्रभुता के 'पूरी तरह कमजोर हो जाने' के रूप में सामने आएगा।;
तेहरान, ईरान ने शनिवार को अमेरिका की ओर से लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की और कहा कि इसका नतीजा संयुक्त राष्ट्र आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियाद मानी जाने वाली देशों की संप्रभुता के 'पूरी तरह कमजोर हो जाने' के रूप में सामने आएगा।
यह बयान उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि ईरान को सहयोग करने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाया जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी घोषणा केवल एक देश के खिलाफ जारी अवैध 'आर्थिक युद्ध' नहीं है। यह संयुक्त राष्ट्र के हर स्वतंत्र सदस्य देश पर अपनी सीमा से बाहर जाकर संप्रभु अधिकार जताने की कोशिश है।"
उन्होंने कोई भी देश कानूनी रूप से दूसरे देशों के बैंकों, कंपनियों या हवाई अड्डों को, जो अपने-अपने देशों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, किसी अन्य देश के साथ वैध व्यापारिक संबंध खत्म करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
बाघेई ने कहा, "ऐसे सेकेंडरी प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है। ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(1) में निहित देशों की समान संप्रभुता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की ओर से निकारागुआ मामले में स्थापित हस्तक्षेप-निषेध सिद्धांत के भी खिलाफ हैं। किसी संप्रभु देश को उसकी वैध नीतियां बदलने के लिए आर्थिक दबाव में लाना स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।"
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन कदमों को ऐसे नौसैनिक नाकेबंदी उपायों के साथ जोड़ा जाए जिन्हें ईरान 'सैन्य आक्रमण' के बराबर मानता है, तो इससे अन्य देशों की संप्रभुता केवल एक ऐसी चीज बनकर रह जाएगी जिसे कोई ताकतवर देश अपनी इच्छा से मान्यता दे या वापस ले सके।
बाघेई ने कहा कि इन मांगों को मान लेने से किसी देश को न तो सुरक्षा मिलेगी और न ही सम्मान। इसका मतलब केवल इतना होगा कि उसके बैंक, कंपनियां और हवाई अड्डे किसी विदेशी शक्ति की अनुमति पर ही काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस नीति का अंतिम परिणाम संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मूल भावना को कमजोर करना होगा।
बाघेई ने कहा कि आखिरकार इसका नतीजा यह होगा कि संयुक्त राष्ट्र आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियाद मानी जाने वाली देशों की संप्रभुता पूरी तरह कमजोर पड़ जाएगी। यह दुनिया को फिर से पारंपरिक औपनिवेशिक व्यवस्था की ओर ले जाने वाला एक खतरनाक रास्ता साबित हो सकता है।