बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी: 24 घंटे में दो और हत्याएं, एक महीने में 11 की मौत
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। बीते 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग जिलों में दो हिंदू नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
ढाका/राजबाड़ी/गाजीपुर। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। बीते 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग जिलों में दो हिंदू नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इन ताजा घटनाओं के साथ ही पिछले एक महीने में देशभर में मारे गए हिंदुओं की संख्या 11 तक पहुंच गई है। मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
राजबाड़ी में पेट्रोल पंप कर्मचारी की हत्या
पहली घटना बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में शुक्रवार तड़के हुई। समाचार एजेंसी प्रेट्र और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां एक पेट्रोल पंप पर काम करने वाले हिंदू युवक को सिर्फ इसलिए जान से हाथ धोना पड़ा क्योंकि उसने ईंधन के पैसे मांगे थे। मृतक की पहचान 30 वर्षीय रिपन साहा के रूप में हुई है, जो राजबाड़ी के गोलंदा मोड़ के पास स्थित करीम पेट्रोल पंप पर कर्मचारी था। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब साढ़े चार बजे एक काले रंग की एसयूवी पेट्रोल पंप पर पहुंची। वाहन में लगभग पांच हजार टका (करीब 3,700 रुपये) का पेट्रोल भरवाया गया। इसके बाद कार चालक बिना भुगतान किए वहां से निकलने लगा।
जब रिपन साहा ने भुगतान की मांग की और वाहन को रोकने की कोशिश की, तो आरोपी चालक ने कार को तेज कर उसके ऊपर चढ़ा दी। गंभीर चोट लगने से रिपन की मौके पर ही मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी वाहन समेत फरार हो गया।
बीएनपी से जुड़े नेता का नाम आया सामने
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया और उसके मालिक तथा चालक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, वाहन मालिक की पहचान अबुल हाशेम उर्फ सुजान (55) के रूप में हुई है, जबकि चालक का नाम कमाल हुसैन (43) बताया गया है। पुलिस ने बताया कि अबुल हाशेम बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की राजबाड़ी जिला इकाई का पूर्व कोषाध्यक्ष रह चुका है और जिला युवा दल का भी पूर्व अध्यक्ष रहा है। पेशे से वह एक ठेकेदार है। इस तथ्य के सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और हत्या के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
गाजीपुर में मिठाई दुकान के मालिक की फावड़े से हत्या
दूसरी घटना गाजीपुर जिले से सामने आई है, जहां एक हिंदू दुकानदार की पीट-पीटकर और फावड़े से हमला कर हत्या कर दी गई। स्थानीय वेबपोर्टल बीडीन्यूज24 डॉट कॉम के अनुसार, यह घटना शनिवार सुबह करीब 11 बजे हुई। मृतक की पहचान 55 वर्षीय लिटन चंद्र घोष के रूप में हुई है, जो काली बारानागर रोड पर स्थित ‘बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल’ नामक मिठाई की दुकान के मालिक थे। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुकान में 28 वर्षीय मासूम मियां और 17 वर्षीय हिंदू कर्मचारी अनंत दास के बीच किसी छोटी बात को लेकर कहासुनी हो गई। देखते ही देखते यह विवाद मारपीट में बदल गया।
बीच-बचाव करना पड़ा भारी
झगड़े की सूचना मिलने पर मासूम मियां के माता-पिता मोहम्मद स्वपन मियां और माजेदा खातून भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने अनंत दास के साथ मारपीट शुरू कर दी। स्थिति को बिगड़ता देख दुकानदार लिटन चंद्र घोष ने बीच-बचाव करने और अपने कर्मचारी को बचाने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसी दौरान आरोपियों ने लिटन घोष पर भी हमला कर दिया। उनके सिर पर फावड़े से जोरदार वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा हो गए और तीनों आरोपियों मासूम मियां, स्वपन मियां और माजेदा खातून को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
अल्पसंख्यक संगठनों में आक्रोश
बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद के कार्यकारी महासचिव मनींद्र कुमार नाथ ने दोनों घटनाओं की पुष्टि करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार हो रही हिंसा बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि एक महीने में 11 हिंदुओं की हत्या यह दर्शाती है कि अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। नाथ ने सरकार से मांग की कि दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाए तथा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
एक महीने में 11 हत्याएं, बढ़ती चिंता
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, हाल के हफ्तों में बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों से अल्पसंख्यकों पर हमले, हत्या और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कई घटनाएं सामने आई हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल इन दोनों हत्याओं ने बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं।