ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश में हाल के महीनों में आई तेज राजनीतिक उथल-पुथल और भारत-विरोधी भावना के उभार ने वहां रह रहे हजारों भारतीय छात्रों, खासकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों, को गहरी चिंता में डाल दिया है। वर्षों तक अपेक्षाकृत सुरक्षित और किफायती शिक्षा के लिए पसंदीदा गंतव्य रहा बांग्लादेश अब अनिश्चितता और डर के माहौल से घिरता दिख रहा है। मौजूदा हालात में नौ हजार से अधिक भारतीय मेडिकल छात्र वहां नामांकित हैं, जो भारत के महंगे निजी मेडिकल कॉलेजों के विकल्प के तौर पर बांग्लादेश की कम ट्यूशन फीस और सांस्कृतिक निकटता के कारण यहां पहुंचे थे।
सत्ता परिवर्तन के बाद बदला माहौल
एक अंग्रेजी दैनिक की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 तक भारतीय छात्रों के लिए बांग्लादेश का शैक्षणिक माहौल अपेक्षाकृत सहज और स्थिर था। भारतीय छात्र ढाका और अन्य शहरों के मेडिकल कॉलेजों में न केवल पढ़ाई कर रहे थे, बल्कि स्थानीय शैक्षणिक जीवन में भी सहजता से घुलमिल गए थे। हालांकि, अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े विद्रोह के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के साथ ही हालात तेजी से बदले। सत्ता परिवर्तन के बाद देश में राजनीतिक तनाव, विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं में इजाफा हुआ, जिसका असर विदेशी छात्रों पर भी दिखने लगा।
हमले की घटना ने बढ़ाई दहशत
दिसंबर 2024 में एक भारतीय मेडिकल छात्र पर कथित तौर पर जानलेवा हमला हुआ। इस घटना ने भारतीय छात्रों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया। कई छात्रों का कहना है कि यह हमला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक-राजनीतिक माहौल का संकेत था। इस घटना के बाद यह धारणा और मजबूत हुई कि अब असुरक्षा का संबंध सिर्फ सामान्य कानून-व्यवस्था से नहीं, बल्कि राष्ट्रीयता और पहचान से भी जुड़ता जा रहा है। कई भारतीय छात्रों ने अपने परिवारों को हालात के बारे में चिंता जताते हुए बताया कि वे अब पहले की तरह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हिंसा
बांग्लादेश में आने वाले महीनों में आम चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है, लेकिन इससे डर का माहौल पूरी तरह कम नहीं हुआ है। राजनीतिक और रक्षा मामलों के विश्लेषक एमए हुसैन का कहना है कि भारतीय हिंदू छात्रों की चिंता बहुआयामी है। उनके अनुसार, “शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद से धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं, पर हमले बढ़ने की खबरें हैं। ढाका प्रशासन इन हमलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताता है, न कि सांप्रदायिक। लेकिन जिस छात्र की पहचान उसके नाम या धर्म से साफ झलकती हो, उसके लिए यह फर्क बहुत मायने नहीं रखता।”
कक्षा और परीक्षाओं तक असर का आरोप
कुछ भारतीय छात्रों का दावा है कि राजनीतिक माहौल का असर अब अकादमिक जीवन तक महसूस किया जा रहा है। वे बताते हैं कि परीक्षाओं के दौरान व्यवहार में कठोरता, प्रशासनिक देरी और अनौपचारिक भेदभाव जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। एमए हुसैन के शब्दों में, “राजनीति में इरादे से ज्यादा असर मायने रखता है। अगर किसी छात्र को यह महसूस होने लगे कि उसकी राष्ट्रीय या धार्मिक पहचान उसके शैक्षणिक मूल्यांकन को प्रभावित कर रही है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।”
शिक्षा पर मंडराता संकट
भारतीय छात्र बांग्लादेशी मेडिकल संस्थानों के लिए सिर्फ छात्र नहीं हैं, बल्कि वे ट्यूशन फीस और अकादमिक आदान-प्रदान के जरिए शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा भी हैं। वर्षों से भारत और बांग्लादेश के बीच शिक्षा को एक तटस्थ और सहयोग का क्षेत्र माना जाता रहा है, जो राजनीतिक मतभेदों से काफी हद तक अछूता रहता था। लेकिन मौजूदा हालात में यह धारणा टूटती नजर आ रही है। कई छात्रों ने शिकायत की है कि डिग्रियां मिलने में देरी हो रही है, परीक्षाओं और इंटर्नशिप की समय-सीमा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और उनका भविष्य अधर में लटकता महसूस हो रहा है।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी बांग्लादेश में हालात को लेकर चिंता जताई है। संगठन के अनुसार, महिलाओं, लड़कियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाओं में हाल के महीनों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, बांग्लादेश सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और हिंसा की घटनाएं राजनीतिक अस्थिरता का नतीजा हैं, न कि किसी समुदाय विशेष के खिलाफ लक्षित अभियान का।
भारतीय छात्रों के सामने विकल्पों की कमी
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश भारतीय मेडिकल छात्रों के पास तुरंत कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है। भारत में निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस बहुत अधिक है, जबकि सरकारी कॉलेजों में सीटें सीमित हैं। ऐसे में पढ़ाई बीच में छोड़कर लौटना कई छात्रों के लिए संभव नहीं। छात्रों और उनके परिवारों को उम्मीद है कि दोनों देशों की सरकारें इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगी और शिक्षा को राजनीतिक टकराव से अलग रखते हुए भारतीय छात्रों की सुरक्षा और भविष्य को सुनिश्चित करेंगी।
भविष्य पर अनिश्चितता
फिलहाल, बांग्लादेश में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्र असमंजस और चिंता के दौर से गुजर रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता, सुरक्षा का डर और अकादमिक अनिश्चितता ने उनके सपनों पर सवालिया निशान लगा दिया है। आने वाले महीनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह न सिर्फ बांग्लादेश की राजनीति, बल्कि हजारों छात्रों के करियर और जीवन को भी प्रभावित करेगा।