रिपब्लिकन जांच में आरोपः हार्वर्ड ने अमेरिकी सुरक्षा से अधिक चीन के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी
वॉशिंगटन, रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व में हुई कांग्रेस की जांच में आरोप लगाया गया है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के बजाय चीन के साथ फायदेमंद रिश्तों को प्राथमिकता दी और बीजिंग की सेना तथा मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी संस्थाओं के साथ रिसर्च के संबंध बनाए रखे।;
वॉशिंगटन, रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व में हुई कांग्रेस की जांच में आरोप लगाया गया है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के बजाय चीन के साथ फायदेमंद रिश्तों को प्राथमिकता दी और बीजिंग की सेना तथा मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी संस्थाओं के साथ रिसर्च के संबंध बनाए रखे।
कॉम्प्रोमाइज्ड इंडिपेंडेंस: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सीसीपी का प्रभाव" नामक 53 पन्नों की रिपोर्ट हाउस सेलेक्ट कमेटी ऑन चाइना और हाउस एजुकेशन एंड वर्कफोर्स कमेटी ने जारी की।
कमेटी ने बताया कि उन्होंने हार्वर्ड और चीनी सरकार के हजारों पेजों के दस्तावेजों की समीक्षा की, यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों से बातचीत की और कई गवाहों के बयान सुने।
सेलेक्ट कमेटी के चेयरमैन जॉन मूलनार ने कहा, "अमेरिकी लोग उम्मीद करते हैं कि हमारे देश की प्रमुख यूनिवर्सिटीज अमेरिकी रिसर्च और इनोवेशन की रक्षा करेंगी और कभी भी हमारे देश के दुश्मनों के हितों को आगे नहीं बढ़ाएंगी। अभी, हार्वर्ड इस उम्मीद पर खरा उतरने में नाकाम हो रहा है।"
उन्होंने कहा, "चीन-विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा होने देने से लेकर पीएलए से जुड़ी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने तक, हार्वर्ड ने गंभीर गलतियां की हैं और अब उसे और गलतियों को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।"
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि हार्वर्ड से जुड़े रिसर्चर्स ने चीन के डिफेंस रिसर्च और इंडस्ट्रियल बेस से जुड़ी यूनिवर्सिटीज के स्कॉलर्स के साथ मिलकर काम किया। इसमें कहा गया है कि कुछ रिसर्च ऐसे क्षेत्रों से जुड़ी थीं जिनका इस्तेमाल आम लोगों और सेना, दोनों के लिए हो सकता है, जैसे कि रोबोटिक्स।
इसमें यह भी कहा गया है कि हार्वर्ड के 'चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' ने एक एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम आयोजित किया था, जिसमें शायद 'शिनजियांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्प्स' के सदस्य शामिल हुए हों। इस चीनी पैरामिलिट्री संगठन पर अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने प्रतिबंध लगाया हुआ है।
रिपोर्ट में माना गया है कि इसमें शामिल होने वालों के बारे में सबूत साफ नहीं थे। इसमें कहा गया है कि प्रोग्राम आयोजित करने वाली हार्वर्ड की प्रोफेसर ने बताया कि उन्हें पार्टिसिपेंट्स की जांच-पड़ताल करने की किसी जरूरत के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी।
जांच में हार्वर्ड ग्लोबल नाम की एक नॉन-प्रॉफिट सहयोगी संस्था पर भी ध्यान दिया गया। कमेटियों का आरोप था कि इसे इस तरह से बनाया गया था ताकि उन मामलों में फंडिंग को दूसरी तरफ से लाया जा सके, जहां यूनिवर्सिटी कानूनी या वित्तीय कारणों से किसी स्पॉन्सर की शर्तें नहीं मान सकती थी।
कमेटियों ने कहा कि रिपोर्ट का ड्राफ्ट मिलने के बाद हार्वर्ड ने अपनी सहयोगी संस्था की वेबसाइट से वह जानकारी हटा दी।
एजुकेशन एंड वर्कफोर्स कमेटी के चेयरमैन टिम वालबर्ग ने कहा, "हार्वर्ड ने विदेशी फंडिंग की जानकारी देने वाले संघीय कानूनों से बचने की साफ कोशिश में एक संस्था बनाई। यह स्वीकार्य नहीं है, खासकर तब जब हार्वर्ड का इन नियमों का पालन न करने का इतिहास रहा है।"
कमेटियों द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों में फाइनल रिपोर्ट पर हार्वर्ड की कोई नई सार्वजनिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं थी।
रिपोर्ट में हार्वर्ड से कहा गया है कि वह अपने रिसर्च सिक्योरिटी ऑपरेशन्स को सेंट्रलाइज करे, अपनी जांच-पड़ताल की प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव करे, राष्ट्रीय सुरक्षा और एक्सपोर्ट-कंट्रोल की जानकारी रखने वाले अधिकारियों को नियुक्त करे और अमेरिका की प्रतिबंधित या प्रतिबंधों वाली लिस्ट में शामिल संस्थाओं के साथ सहयोग पर रोक लगाए।