पांच मिनट की मुद्रा बदल देगी आपकी जिंदगी

नई दिल्ली, हमारी हथेलियों में सिर्फ काम करने की ताकत ही नहीं, बल्कि ऊर्जा को साधने की अद्भुत शक्ति भी छिपी है। योग में हाथों की इन्हीं खास स्थितियों को मुद्रा कहा जाता है। ऐसी ही एक बेहद शक्तिशाली और असरदार कालेश्वर मुद्रा है। यह मुद्रा न सिर्फ मन को शांति देती है, बल्कि अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करके सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।;

By :  IANS
Update: 2026-11-06 08:26 GMT

नई दिल्ली, हमारी हथेलियों में सिर्फ काम करने की ताकत ही नहीं, बल्कि ऊर्जा को साधने की अद्भुत शक्ति भी छिपी है। योग में हाथों की इन्हीं खास स्थितियों को मुद्रा कहा जाता है। ऐसी ही एक बेहद शक्तिशाली और असरदार कालेश्वर मुद्रा है। यह मुद्रा न सिर्फ मन को शांति देती है, बल्कि अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करके सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।

'कालेश्वर' का अर्थ है 'समय के स्वामी' (भगवान शिव का एक रूप) और यह मुद्रा व्यक्ति को समय के प्रति सचेत कर टालमटोल की आदत को सुधारने में भी मदद करती है।

हमारे हाथ सिर्फ काम करने के लिए नहीं बने हैं, बल्कि इनमें ऊर्जा को साधने की भी अद्भुत शक्ति छिपी है। योग शास्त्र में कहा गया है कि हमारी उंगलियों में पांच तत्वों का वास होता है - अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल। जब हम उंगलियों को एक खास तरीके से मिलाते हैं, तो शरीर के अंदर की ऊर्जा का प्रवाह बदल जाता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह मुद्रा चंचल मन को शांत करने, मानसिक तनाव को दूर करने और बुरी आदतों या व्यसनों से मुक्ति पाने के लिए एक सर्वश्रेष्ठ पूरक योग अभ्यास है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मन में चिंता, गुस्सा, डर और नकारात्मक सोच हावी होने लगती है, तब कालेश्वर मुद्रा मन को शांत करने का सबसे सरल उपाय बन जाती है।

इसी के साथ ही, यह मुद्रा इच्छाशक्ति को मजबूत करती है, जिससे सिगरेट, शराब या किसी भी प्रकार के हानिकारक व्यसन व तलब को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इस मुद्रा के अभ्यास करने का समय भी बताया गया है। इसका अभ्यास सुबह के समय (ब्रह्ममुहूर्त) करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है, हालांकि इसे दिन में किसी भी समय किया जा सकता है। अभ्यासकर्ता प्रतिदिन 10 से 20 मिनट तक इसका अभ्यास करना पर्याप्त है। आप चाहें तो इसे 5-5 मिनट के सत्रों से शुरू कर सकते हैं।

आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यासकर्ता इस मुद्रा को करते समय इस बात का भी ध्यान दें कि इसे करते समय उंगलियों को आपस में बहुत जोर से या कसकर न दबाएं। यदि शरीर में वात (वायु तत्व) का असंतुलन हो, तो इस मुद्रा का अभ्यास संयम और सीमित अधिक में ही करें।


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