गुजरात पुलिस की बड़ी कार्रवाई, धोखाधड़ी मामले में मुंबई से तीन आरोपी गिरफ्तार
सूरत सिटी की साइबर क्राइम ब्रांच ने मुंबई से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 1.10 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस को पता चला है कि इस मामले में इस्तेमाल किए गए बैंक अकाउंट के खिलाफ कई राज्यों से शिकायतें आई थीं।;
सूरत। सूरत सिटी की साइबर क्राइम ब्रांच ने मुंबई से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 1.10 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस को पता चला है कि इस मामले में इस्तेमाल किए गए बैंक अकाउंट के खिलाफ कई राज्यों से शिकायतें आई थीं।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान राहुल रजक (27), आशीष सोनार (37) और भूषण सेंडने (34) के तौर पर हुई है।
पुलिस ने बताया कि रजक ने अपने नाम से एक फर्म बनाई, उद्यम सर्टिफिकेट लिया और आईडीएफसी बैंक में एक करंट अकाउंट खुलवाया, जिसे उसने 10,000 रुपए में सोनार को सौंप दिया।
सोनार ने कथित तौर पर यह अकाउंट 30,000 रुपए में सेंडने को दिया और बाद में सेंडने ने इसे 20,000 रुपए में एक और आरोपी को सौंप दिया।
पुलिस के अनुसार, 18 अक्टूबर 2025 और 9 जनवरी 2026 के बीच इस करंट अकाउंट के जरिए 2,41,03,506 रुपए का लेन-देन हुआ।
नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर जांच करने पर इस अकाउंट से जुड़ी अलग-अलग राज्यों से 29 शिकायतें मिलीं, जिनमें कथित तौर पर 16,13,44,790 रुपए यानी लगभग 16.13 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी शामिल थी।
डीसीपी (साइबरक्राइम सेल) विशाखा जैन ने कहा, "गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने के लिए कुल मिलाकर 60,000 रुपए कमीशन के तौर पर मिले थे।"
यह मामला तब शुरू हुआ जब शिकायतकर्ता से शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर संपर्क किया गया और ज्यादा मुनाफे का वादा किया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने उसे एक नकली एक्सिस बैंक ऐप की एपीके फाइल भेजी और दावा किया कि वे बैंक की कस्टमर केयर सर्विस से बात कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता से कथित तौर पर ऐप डाउनलोड करने, डीमैट अकाउंट बनाने और उसके जरिए ट्रेडिंग करने के लिए कहा गया। अकाउंट बनने के बाद शिकायतकर्ता को ट्रेडिंग के लिए अलग-अलग बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए।
पुलिस ने बताया कि उसने 1,10,90,000 रुपए ट्रांसफर किए, लेकिन जब उसने बाद में अपना निवेश और कथित मुनाफा निकालना चाहा, तो आरोपियों ने पैसे निकालने और अन्य शुल्क के नाम पर और पैसे की मांग की।
पुलिस ने बताया, "शिकायतकर्ता को सिर्फ 5,000 रुपए निकालने की इजाजत मिली, जबकि 1,10,85,000 रुपए ब्लॉक रहे। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।"
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी अमेंडमेंट एक्ट, 2008 की धारा 66(डी) के तहत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने कहा कि धोखाधड़ी में शामिल अन्य आरोपियों का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं। साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन शेयर मार्केट निवेश के जरिए ज्यादा रिटर्न का वादा करने वाले विज्ञापनों से सावधान रहें और बिना जांच-पड़ताल के अनजान लोगों को पैसे ट्रांसफर न करें।