काजल बारैया हत्याकांड: गुजरात की अदालत ने 31 दिन की सुनवाई के बाद आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई
गुजरात के भावनगर जिले की एक अदालत ने एक महिला की बेरहमी से हत्या करने के दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले की सुनवाई 31 दिनों के भीतर पूरी हो गई।;
गांधीनगर। गुजरात के भावनगर जिले की एक अदालत ने एक महिला की बेरहमी से हत्या करने के दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले की सुनवाई 31 दिनों के भीतर पूरी हो गई।
पुलिस ने गुरुवार को बताया कि आरोपी फैसल उर्फ खटकी लखानी को 3 सितंबर को भावनगर स्टेट ट्रांसपोर्ट (एसटी) बस स्टैंड के पब्लिक एंट्री गेट के पास काजलबेन डी. बारैया की हत्या करने का दोषी ठहराया गया।
पुलिस के अनुसार, ट्रायल पूरा होने के बाद 5 नवंबर को सजा सुनाई गई।
पुलिस ने बताया कि वरतेज का रहने वाला लखानी, जो बस स्टैंड के पास फुटपाथ पर रहता था, उसने इलाके में अपना दबदबा कायम करने के लिए बारैया पर हमला किया। उसने महिला को गालियां दीं, कई बार लात-घूंसे मारे, उसके बाल पकड़े और उसका सिर दीवार और टाइल वाले फर्श पर दे मारा। उसने महिला के सिर, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी वार किए, जिससे उसे जानलेवा चोटें आईं। 4 सितंबर को पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।
अपराध की गंभीरता को देखते हुए, रेंज इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) राजेंद्र असारी के निर्देश पर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया। यह टीम भावनगर के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) नितेश पांडे और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस आर. आर. सिंघल की देखरेख में काम कर रही थी।
जांच के दौरान पुलिस ने चश्मदीदों से पूछताछ की और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 183 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने उनके बयान दर्ज कराए।
आरोपी और पीड़िता की पहचान पक्की करने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज जुटाए गए और फोरेंसिक विभाग की मदद से उनकी जांच की गई।
फोरेंसिक अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा करके सबूत भी इकट्ठे किए। अस्पताल में पोस्टमार्टम से मौत के कारण का पता चला। हत्या के एक महीने बाद, 4 अक्टूबर को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
राज्य सरकार ने मामले में ट्रायल चलाने के लिए वरिष्ठ वकील उत्पल दवे को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया। अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता, चश्मदीदों और पंच गवाहों के बयानों के साथ-साथ जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी ने कथित तौर पर एक चश्मदीद, जो अभियोजन पक्ष का एक महत्वपूर्ण गवाह था, का अपहरण करवा दिया था ताकि वह अदालत में गवाही न दे सके।
आरोप है कि गवाह को तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था। इस घटना के संबंध में पुलिस स्टेशन में एक अलग मामला दर्ज किया गया था और पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि गवाह को अदालत में गवाही देने के लिए लाया जाए।