सपा व कांग्रेस के बड़े नेताओं का प्रचार से दूरियां बनाना पड़ा महंगा
ग्रेटर नोएडा ! विधान सभा चुनाव में भगवा रंग के सामने सारे रंग फीके पड़ गए हैं, जिले में तीनों विधान सभा सीट में भाजपा को मिली जीत को समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी मिली करारी हार हजम नहीं हो रहा
ग्रेटर नोएडा ! विधान सभा चुनाव में भगवा रंग के सामने सारे रंग फीके पड़ गए हैं, जिले में तीनों विधान सभा सीट में भाजपा को मिली जीत को समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी मिली करारी हार हजम नहीं हो रहा है। सत्ताधीन पार्टी के पड़े नेताओं के सामने सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई है कि पार्टी हाई कमान को क्या जवाब देगें।
पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से समझौता कर अपने उम्मीद्वार उतारे वहीं गौतमबुद्धनगर जिले के तीनों विधान सभा सीट में नोएडा से सुनील चौधरी सपा से दादरी से कांग्रेस समीर भाटी व जेवर से नरेन्द्र नागर समाजवादी पार्टी से चुनावी मैदान में थे।
गठबंधन के उम्मीद्वारों को करारी हार की मुंह खानी पड़ी है। हारे हुए प्रत्याशी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस के नेता प्रचार में नहीं उतरे तो कांग्रेस के प्रत्याशी का आरोप है कि समाजवादी पार्टी के नेता प्रचार करने के लिए क्षेत्र में नहीं आए। लखनऊ में समाजवादी पार्टी में जिस तरह से कलह चल रही थी उसी कलह का कहीं परिणाम गौतमबुद्ध नगर के तीनों सीटों पर देखने को मिला है। गौतमबुद्धनगर जिले में समाजवादी पार्टी से राज्य सभा सांसद सुरेन्द्र नागर और एमएलसी नरेन्द्र भाटी को पार्टीहाई कमान को जवाब देना होगा। हार की समीक्षा बैठक में दोनों नेताओं को जवाब देना होगा।
जनता की अनदेखी से उखड़ा हाथी का पांव
बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी पिछले दो विधान सभा से जेवर और दादरी विधानसभा सीट पर कब्जा जमाए हुए थे, जन प्रतिनिधियों ने अपने कार्यकाल के दौरान क्षेत्र के विकास के साथ जनता के भावनाओं के साथ अनदेखी किया। क्षेत्र की जनता इस बात को भूल चुकी थी कि उनका प्रतिनिधि कौन है, चुने हुए प्रतिनिधियों जनता के बीच जाना बंद कर दिए थे, यही वजह कि उनका सीधा संवाद लगभग खत्म हो चुका था, क्षेत्र की जनता ने एक झटके में उनके उम्मीदों के किले को धराशाई कर दिया। क्षेत्र की जनता अब जागरूक हो चुकी है कि उनको विकास चाहिए न कि एक ऐसा प्रतिनधि जो उनकी समस्याओं का समाधान कराए। क्षेत्र में किसानों की बहुत समस्या है, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्प्रेस-वे प्राधिकरण में बैठे अधिकारी घुमाते रहते हैं उनकी सुनवाई नहीं होती है, सामाजिक संगठनों और किसान संगठनों को अपने हक की लड़ाई खुद ही लडऩी पड़ रही है। जेवर व दादरी की जनता जान चुकी थी कि क्षेत्र में परिवर्तन जरुरी हो गया है, मोदी लहर में जनता ने हाथी का पांव उखाडक़र क्षेत्र में कमल खिला दिया।