छोटे हवाई अड्डों के विकास पर 10 हजार करोड़ खर्च करेगी सरकार : पुरी

भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2019 लोकसभा में शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित हो गया

Update: 2019-08-03 05:41 GMT

नई दिल्ली। भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2019 लोकसभा में शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित हो गया। यह विधेयक राज्यसभा में 16 जुलाई को पारित हो चुका है। 

इस विधेयक के जरिये ‘बड़े’ हवाई अड्डों की परिभाषा बदली जाएगी। अभी सालाना 15 लाख या इससे ज्यादा यात्रियों की आवाजाही वाले हवाई अड्डे इस श्रेणी में आते हैं जबकि विधेयक में इसे बढ़ाकर 35 लाख या इससे ज्यादा करने का प्रस्ताव है। देश में बड़े हवाई अड्डों के लिए हवाई अड्डा शुल्क तय करने का अधिकार 2008 में गठित नियामक विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (एईआरए) के पास है। अभी 33 हवाई अड्डे उसके नियंत्रण में हैं। परिभाषा बदलने के बाद सिर्फ 16 हवाई अड्डे उसके नियंत्रण में रह जायेंगे। अन्य 17 का नियंत्रण नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास चला जायेगा। 

विधेयक पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुये नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि छोटे हवाई अड्डों का नियंत्रण एईआरए के हाथ से निकलने के बाद उनकी अनदेखी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि सरकार छोटे हवाई अड्डों के विकास पर अगले चार साल में 10,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

उन्होंने कहा कि हाल में जिन छह हवाई अड्डों के निजीकरण की मंजूरी दी गयी है उनमें मेंगलुरु को छोड़कर अन्य छह का नियंत्रण एईआरए के हाथ में ही रहेगा। 

श्री पुरी ने कहा कि सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। विनिवेश की निगरानी के लिए मंत्रियों का समूह गठित कर दिया गया है और जल्द इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी। 

उन्होंने कहा कि विमान ईंधन पर कर ज्यादा होने से विमान सेवा कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए वह स्वयं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बात कर विमान ईंधन को पेट्रोल और डीजल की श्रेणी से अलग कर करने की माँग करेंगे ताकि उसे वस्तु एवं सेवा कर में लाया जाये और उस पर कर कम हो सके। 

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