एम्स में इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू: हरीश के दो लाइफ सपोर्ट के प्रमुख पाइप हटाए गए, VIDEO आंखों में ला देगा आंसू

सूत्रों के मुताबिक हरीश राणा को जीवनरक्षक प्रणाली से जुड़े कुछ प्रमुख पाइपों से अलग किया गया है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत सावधानीपूर्वक की जा रही है।

Update: 2026-03-15 12:38 GMT
नई दिल्‍ली: गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा से जुड़ा एक संवेदनशील मामला इन दिनों चर्चा में है। लगभग 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन बिता रहे हरीश राणा के लिए अब एम्स (AIIMS) में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की प्रक्रिया शुरू की गई है। जानकारी के अनुसार उन्हें दिल्ली स्थित एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति की निगरानी करते हुए चरणबद्ध तरीके से जीवनरक्षक उपकरणों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

लाइफ सपोर्ट से जुड़े उपकरण हटाए गए

सूत्रों के मुताबिक हरीश राणा को जीवनरक्षक प्रणाली से जुड़े कुछ प्रमुख पाइपों से अलग किया गया है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत सावधानीपूर्वक की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे और चिकित्सकीय निगरानी में पूरी की जाती है, ताकि मरीज की स्थिति को लगातार समझा जा सके। इस दौरान डॉक्टरों की टीम हर चरण में उनकी शारीरिक प्रतिक्रिया पर नजर बनाए हुए है।

13 साल से बिस्तर पर अचेत अवस्था में

बताया जा रहा है कि हरीश राणा पिछले करीब 13 साल से अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े थे। लंबे समय से उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था और डॉक्टरों के अनुसार उनके ठीक होने की संभावना बेहद कम थी। इसी परिस्थिति को देखते हुए परिवार की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एम्स की मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के आधार पर मामले की सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी जरूरी शर्तों को ध्यान में रखते हुए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। अदालत ने निर्देश दिया कि हरीश राणा की अंतिम चिकित्सा प्रक्रिया सम्मानजनक और संवेदनशील तरीके से एम्स में पूरी की जाए।अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि पूरी प्रक्रिया मेडिकल बोर्ड की निगरानी और कानूनी दिशानिर्देशों के तहत ही संचालित हो।

डॉक्टरों की टीम रख रही निगरानी

एम्स के डॉक्टरों की एक विशेष टीम इस पूरी प्रक्रिया को देख रही है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार हरीश राणा की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है और हर कदम मेडिकल प्रोटोकॉल और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप उठाया जा रहा है। पैलिएटिव केयर यूनिट का उद्देश्य गंभीर और असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अंतिम समय में आराम और देखभाल देना होता है।

प्रक्रिया की कोई तय समयसीमा नहीं

सूत्रों का कहना है कि जीवनरक्षक उपकरणों के कुछ हिस्से हटाए जाने के बाद आगे की स्थिति अब पूरी तरह शरीर की प्रतिक्रिया और चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करेगी। डॉक्टरों के अनुसार पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया कब पूरी होगी, इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की जा सकती। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और उसी के अनुसार चिकित्सा निर्णय लिए जाते हैं।

पैसिव यूथेनेशिया क्या है

इच्छामृत्यु (Euthanasia) उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी व्यक्ति को गंभीर और असाध्य बीमारी की स्थिति में लंबे समय तक कृत्रिम जीवन समर्थन से हटाकर प्राकृतिक रूप से जीवन के अंतिम चरण तक पहुंचने दिया जाता है। आमतौर पर इसे दो प्रकारों में बांटा जाता है- सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia) और निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia)। निष्क्रिय इच्छामृत्यु में मरीज को जीवित रखने वाले लाइफ सपोर्ट सिस्टम या इलाज को धीरे-धीरे हटाया जाता है, ताकि शरीर अपनी प्राकृतिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ सके। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ पैसिव यूथेनेशिया को कानूनी मान्यता दी है। इसके लिए परिवार की सहमति, मेडिकल बोर्ड की राय और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है।

वायरल वीडियो ने लोगों को किया भावुक

इसी बीच सोशल मीडिया पर करीब 22 सेकेंड का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे हरीश राणा से जुड़ा बताया जा रहा है। वीडियो में वह अस्पताल के बिस्तर पर लेटे दिखाई देते हैं और उनकी आंखें ऊपर की ओर टिकी नजर आती हैं। इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर कई लोगों को भावुक कर दिया है। 

एक अहम कानूनी और चिकित्सकीय मामला

एम्स में चल रही यह प्रक्रिया देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु से जुड़े मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात मरीज की गरिमा, परिवार की भावनाओं और चिकित्सा नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखना होता है। फिलहाल डॉक्टरों की टीम पूरे मामले को बेहद संवेदनशीलता के साथ संभाल रही है और हरीश राणा की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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